पुणे न्यूज डेस्क: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। पुणे नगर निगम (PMC) चुनाव से पहले महाविकास अघाड़ी (MVA) में दरार खुलकर सामने आ गई है। शरद पवार और अजित पवार की एनसीपी द्वारा साथ मिलकर चुनाव लड़ने के फैसले ने गठबंधन के संतुलन को बिगाड़ दिया है, जिससे कांग्रेस और उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना (UBT) ने अलग राह तलाशनी शुरू कर दी है।
इस बदले हालात में कांग्रेस और शिवसेना (UBT) अब राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के साथ नया राजनीतिक मोर्चा बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने शिवसेना (UBT) को औपचारिक गठबंधन प्रस्ताव भेज दिया है और दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे पर शुक्रवार को अहम बातचीत होने वाली है। इससे पहले UBT और MNS के बीच भी गठबंधन को लेकर चर्चा हो चुकी है।
इन प्रयासों से यह संकेत मिल रहे हैं कि पुणे में कांग्रेस–UBT–MNS का त्रिकोणीय गठबंधन आकार ले सकता है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी की आगे की चुनावी रणनीति उद्धव ठाकरे और समान सोच वाले दलों के साथ मिलकर तय की जाएगी। इस नए समीकरण का मकसद पुणे में मजबूत राजनीतिक विकल्प खड़ा करना बताया जा रहा है।
अगर पिछले चुनावों पर नजर डालें तो 2017 में कांग्रेस ने अकेले दम पर चुनाव लड़ा था, लेकिन 85 सीटों पर उम्मीदवार उतारने के बावजूद सिर्फ 10 पार्षद ही जीत सकी थी। वहीं शिवसेना (UBT) के पास तब 10 पार्षद थे, जो अब दलबदल के चलते शून्य हो गए हैं। कांग्रेस नेता मोहन जोशी ने पुष्टि की है कि मुंबई में हुई कोर कमेटी बैठक में UBT के साथ गठबंधन का फैसला लिया गया है। माना जा रहा है कि यह नया गठबंधन बीजेपी और अजित पवार गुट के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।