पुणे न्यूज डेस्क: महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के एक मंच पर आने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई थी। इसी बीच पुणे नगर निगम चुनाव को लेकर अजित पवार और शरद पवार के नेतृत्व वाले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों के बीच गठबंधन की अटकलें भी शुरू हो गई थीं। माना जा रहा था कि बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच एनसीपी के दोनों धड़े साथ आ सकते हैं।
इस मुद्दे पर एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले के बयान को भी नरमी के संकेत के तौर पर देखा गया। उनके रुख के बाद उम्मीद जगी कि स्थानीय स्तर पर दोनों गुट आपसी सहमति बना सकते हैं। इसी को लेकर दोनों पक्षों के नेताओं के बीच बातचीत का दौर भी चला, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ सकी।
सूत्रों के मुताबिक, गठबंधन की राह में सबसे बड़ा रोड़ा पार्टी के चुनाव चिन्ह ‘घड़ी’ को लेकर बना। फिलहाल इस सिंबल का इस्तेमाल अजित पवार गुट कर रहा है, जबकि इसका मामला अदालत में विचाराधीन है। यही वजह रही कि चुनावी रणनीति पर सहमति बनना मुश्किल हो गया।
बताया जा रहा है कि बातचीत के दौरान अजित पवार गुट की ओर से यह सुझाव दिया गया था कि शरद पवार का खेमा भी घड़ी सिंबल पर ही चुनाव लड़े। हालांकि शरद पवार गुट ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। इसके बाद गठबंधन को लेकर चल रही चर्चाएं पूरी तरह टूट गईं।