पुणे न्यूज डेस्क: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार की हिस्सेदारी वाली कंपनी अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी ने मुंढवा जमीन विवाद में अब अदालत का दरवाज़ा खटखटाया है। कंपनी ने जमीन के मुख्तारनामा धारक शीतल तेजवानी के खिलाफ बिक्री विलेख को रद्द कराने के लिए दीवानी मुकदमा दायर किया है। अमाडिया के साझेदार दिग्विजय पाटिल ने पुणे की अदालत में विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम, 1963 की धारा 31 के तहत यह याचिका दाखिल की है। इस मामले में अदालत 15 जनवरी 2026 को सुनवाई करेगी।
यह पूरा मामला पिछले महीने उस समय सुर्खियों में आया, जब मुंढवा के पॉश इलाके की करीब 40 एकड़ जमीन, जिसकी कीमत लगभग 300 करोड़ रुपये बताई गई, अमाडिया एंटरप्राइजेज को बेचे जाने पर सवाल खड़े हुए। जांच में सामने आया कि यह जमीन सरकारी है और इसकी बिक्री कानूनी तौर पर संभव नहीं है। इसके साथ ही यह भी आरोप लगे कि इस सौदे में कंपनी को करीब 21 करोड़ रुपये के स्टाम्प शुल्क में छूट दी गई।
आरोप है कि 272 मूल वतनदारों की ओर से मुख्तारनामा रखने वाली शीतल तेजवानी ने यह जानते हुए भी बैनामा कराया कि जमीन सरकार की है। इस प्रक्रिया में तत्कालीन उप-निबंधक रविंद्र तारू की भूमिका भी संदेह के घेरे में आई है। स्टाम्प शुल्क चोरी के आरोप में निबंधन महानिरीक्षक कार्यालय ने दिग्विजय पाटिल, तेजवानी और तारू के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, हालांकि इस प्राथमिकी में पार्थ पवार का नाम शामिल नहीं है।
इधर जिला प्रशासन ने भी इस सौदे को लेकर पाटिल, तेजवानी और निलंबित तहसीलदार सूर्यकांत येवले के खिलाफ अलग मामला दर्ज किया है, जिसकी जांच पुणे पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा कर रही है। ईओडब्ल्यू ने तेजवानी को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है, जबकि तारू भी पुलिस हिरासत में है। येवले पर आरोप है कि उन्होंने भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण को जमीन खाली करने का नोटिस जारी किया था, जबकि यह भूमि अब भी उसी के कब्जे में है। पुणे की अदालत ने हाल ही में येवले की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है।