ताजा खबर
पुणे में ऑटो की छत पर बैठकर सैर करता दिखा कुत्ता, वीडियो देख हंसी नहीं रुकेगी   ||    चार साल बाद पुणे मनपा को मिलेगा नया मेयर, बीजेपी सबसे मजबूत दावेदार   ||    पुणे भूमि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व मंत्री एकनाथ खडसे और पत्नी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी   ||    पुणे में एमईएस के दो अधिकारी रिश्वत लेते गिरफ्तार, सीबीआई की बड़ी कार्रवाई   ||    चीनी रिकवरी में सोमेश्वर अव्वल, श्री छत्रपति ने माळेगांव को छोड़ा पीछे   ||    पुणे में भी साथ आए पवार, नगर निगम चुनाव में एनसीपी और एनसीपी (एसपी) का गठबंधन   ||    सलमान खान का 60वां जन्मदिन और ‘बैटल ऑफ गलवान : देशभक्ति और फैंस के लिए खास पल   ||    राजेश खन्ना की 83वीं बर्थ एनिवर्सरी: बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार को जैकी श्रॉफ ने किया याद   ||    बॉर्डर 2 का ‘घर कब आओगे’ गाना हुआ रिलीज़ से पहले चर्चा का केंद्र, जानिए कलाकार और रिलीज़ डेट   ||    ‘द राजा साब’ नया ट्रेलर रेलसी हुआ, प्रभास की रहस्यमयी और डरावनी वापसी, संक्रांति पर सिनेमाघरों में ध...   ||   

क्या बेटियां हमेशा शक के घेरे में रहेंगी? पुणे हॉस्टल में छात्राओं से जबरन प्रेग्नेंसी टेस्ट का आरोप

Photo Source : Google

Posted On:Tuesday, December 9, 2025

पुणे न्यूज डेस्क: पुणे के सरकारी आदिवासी हॉस्टल में छात्राओं के आरोपों ने बेटियों की सुरक्षा और आज़ादी को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। छात्राओं का कहना है कि छुट्टियों से लौटने के बाद हॉस्टल में एंट्री से पहले उनसे प्रेग्नेंसी टेस्ट करवाया गया। यह मामला न सिर्फ समाज की सोच पर चोट करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि बेटियों को आज भी हर कदम पर अपनी मर्यादा और आज़ादी साबित करनी पड़ती है। घर से बाहर निकली लड़की पर पहला सवाल यही होता है—कहाँ गई थी, क्यों देर हुई? जबकि लड़कों को इतनी पाबंदियों का सामना नहीं करना पड़ता।

महाराष्ट्र की आदिवासी विकास आयुक्त लीना बंसोड़ ने स्पष्ट कहा कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि छात्राओं से इस तरह का टेस्ट कराया जाए। लेकिन हॉस्टल की लड़कियों का दावा है कि उन पर ज़बरदस्ती दबाव बनाया गया। यह हर उस लड़की की निजता और स्वतंत्रता पर सीधा हमला है, जो अपनी पढ़ाई और भविष्य के लिए घर से दूर रहती हैं। यह सवाल भी उठता है—आखिर सुरक्षा के नाम पर लड़कियों को कब तक शक के घेरे में रखा जाएगा?

हमारे समाज में लड़की से जुड़ी हर बात शक से शुरू होती है—वह किससे बात कर रही है, किसके साथ बाहर गई है, क्यों देर हो गई? नाइट-शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं पर चरित्र के शक की उंगलियां उठाई जाती हैं। पुणे की घटना में भी यही मानसिकता झलकती है—जैसे लड़कियां हमेशा किसी गलती की दोषी हों। मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया कि जो छात्रा टेस्ट कराने से मना करती है, उसे हॉस्टल में रहने की अनुमति नहीं दी जाती। यह रवैया साफ दर्शाता है कि लड़कियों को अब भी स्वतंत्र नागरिक नहीं, बल्कि निगरानी की वस्तु समझा जाता है।

अगर वास्तव में सुरक्षा की चिंता है तो प्रेग्नेंसी टेस्ट की बजाय सुरक्षित माहौल, योग्य वॉर्डन, मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग और भरोसेमंद व्यवस्था की ज़रूरत है। बिना अनुमति मेडिकल टेस्ट करवाना कानून और संविधान दोनों का उल्लंघन है। बेटियों की सुरक्षा का मतलब उनके आत्मसम्मान के साथ खिलवाड़ नहीं हो सकता। जरूरत इस सोच को बदलने की है कि महिला को हर बार खुद को सही साबित करने के लिए अग्नि परीक्षा देनी ही पड़े।


पुणे और देश, दुनियाँ की ताजा ख़बरे हमारे Facebook पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें,
और Telegram चैनल पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

You may also like !

मेरा गाँव मेरा देश

अगर आप एक जागृत नागरिक है और अपने आसपास की घटनाओं या अपने क्षेत्र की समस्याओं को हमारे साथ साझा कर अपने गाँव, शहर और देश को और बेहतर बनाना चाहते हैं तो जुड़िए हमसे अपनी रिपोर्ट के जरिए. punevocalsteam@gmail.com

Follow us on

Copyright © 2021  |  All Rights Reserved.

Powered By Newsify Network Pvt. Ltd.