पुणे न्यूज डेस्क: पुणे के भोर तहसील (नसरापुर) में 1 मई को साढ़े तीन साल की बच्ची के साथ हुए यौन उत्पीड़न और हत्या के विरोध में रविवार शाम हजारों नागरिक सड़कों पर उतर आए। आरोपी भीमराव कांबले (65) की गिरफ्तारी के बाद, इस जघन्य अपराध के खिलाफ न्याय की मांग को लेकर पुणे के डेक्कन इलाके में एक विशाल मौन विरोध मार्च निकाला गया।
विरोध मार्च का विवरण:
मार्ग: यह मार्च शाम 6 बजे जंगली महाराज (JM) रोड से शुरू होकर सावरकर भवन तक निकाला गया। बाल गंधर्व चौक पर मार्च का समापन हुआ, जहां भारी संख्या में लोग एकजुट हुए।
प्रतीकात्मक विरोध: प्रदर्शनकारियों ने अपनी बाहों पर काली पट्टी बांधी और मोबाइल की टॉर्च जलाकर अपना आक्रोश और शोक व्यक्त किया। हाथों में 'बच्ची को न्याय दो' और 'आरोपी को फांसी दो' जैसे बैनर थे।
अनुशासन: मार्च का नेतृत्व महिलाओं ने किया, जिसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के सदस्य शामिल हुए। भावुक माहौल के बावजूद प्रदर्शन पूरी तरह अनुशासित और शांत रहा।
पीड़ित परिवार और जनता की मांग:
पीड़ित बच्ची के पिता ने मार्च के दौरान कहा कि इस आंदोलन का उद्देश्य किसी का विरोध करना नहीं, बल्कि सरकार को यह संदेश देना है कि समाज न्याय के प्रति जागरूक है। उन्होंने सरकार से ऐसे मामलों में स्पीडी जस्टिस (त्वरित न्याय) सुनिश्चित करने की अपील की।
प्रदर्शनकारियों ने कानून व्यवस्था को और अधिक कड़ा बनाने और बच्चों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। इस मार्च ने शहर में बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों के प्रति जनता के गहरे गुस्से और एकजुटता को प्रदर्शित किया।