पुणे न्यूज डेस्क: महाराष्ट्र सरकार ने बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को मजबूती देते हुए एक महत्वपूर्ण परियोजना को मंजूरी दी है। रायगढ़ जिले के नेरल (कर्जत) से पुणे जिले के शिरूर तक 134 किलोमीटर लंबे चार-लेन राजमार्ग के निर्माण को हरी झंडी मिल गई है। यह नया कॉरिडोर मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के एक सशक्त विकल्प के रूप में काम करेगा और इस व्यस्त मार्ग पर लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत दिलाएगा।
परियोजना की मुख्य विशेषताएं और मार्ग:
प्रारंभ और समापन: यह राजमार्ग रायगढ़ के नेरल से शुरू होकर पुणे-अहिल्यानगर (अहमदनगर) राजमार्ग पर शिरूर से जुड़ेगा।
प्रमुख पड़ाव: यह मार्ग वांद्रे, पैत और शिरोली जैसे क्षेत्रों से होकर गुजरेगा।
कनेक्टिविटी: उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के अनुसार, यह न केवल मुंबई और पुणे को जोड़ेगा, बल्कि मराठवाड़ा और अहिल्यानगर क्षेत्रों के लिए भी आधुनिक और तेज कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर दबाव होगा कम:
वर्तमान में मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर वाहनों का दबाव इतना बढ़ चुका है कि सप्ताहांत और छुट्टियों के दौरान घंटों तक जाम लगा रहता है। हाल ही में खपोली और लोनावला के बीच 'मिसिंग लिंक' के उद्घाटन के बावजूद ट्रैफिक की समस्या बनी रही। इसके अलावा, फरवरी में खंडाला घाट पर एक टैंकर पलटने से 33 घंटे तक यातायात बाधित रहा था। नया नेरल-शिरूर राजमार्ग इन समस्याओं का समाधान बनेगा और एक्सप्रेसवे के समानांतर एक वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराएगा।
आर्थिक और औद्योगिक विकास को मिलेगी गति:
यह परियोजना महाराष्ट्र के औद्योगिक बेल्ट के लिए 'गेम चेंजर' साबित होगी।
औद्योगिक क्षेत्र: इसका सीधा लाभ खेड़ एसईजेड (Khed SEZ), तलेगांव, चाकण, रांजणगांव और सुपा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को मिलेगा।
क्षेत्रीय विकास: इससे खेड़, शिरूर, आंबेगांव और मावल क्षेत्रों में विकास की गति तेज होगी।
JNPT कनेक्टिविटी: यह मार्ग पुणे-शिरूर रोड पर भीड़भाड़ को कम करने के साथ-साथ मुंबई और जेएनपीटी (JNPT) बंदरगाह के साथ सीधा संपर्क स्थापित करेगा।
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने इस प्रोजेक्ट का श्रेय दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के विजन और उनके द्वारा किए गए प्रयासों को दिया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना रोजगार, निवेश और उद्योग के लिए नए अवसर पैदा करेगी और राज्य के सर्वांगीण विकास में मील का पत्थर साबित होगी।