पुणे न्यूज डेस्क: मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे के 'मिसिंग लिंक' प्रोजेक्ट पर प्रशासन ने सेल्फी लेने, रील बनाने और वाहन रोकने पर सख्त पाबंदी लगाई है, लेकिन इस नियम की धज्जियां खुद जन-प्रतिनिधियों द्वारा उड़ाई जा रही हैं। पिंपरी-चिंचवड़ के महापौर रवि लांडगे और बीजेपी प्रवक्ता केशव उपाध्ये की एक्सप्रेस-वे पर ली गई फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिसने कानून के 'दोहरे मानदंड' (Double Standards) को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। यह तब हुआ है जब प्रशासन ने महज 24 घंटे पहले ही सुरक्षा के मद्देनजर नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी जारी की थी।
एमएसआरडीसी (MSRDC) ने स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए थे कि हाई-स्पीड एक्सप्रेस-वे पर अचानक वाहन रोकना जानलेवा साबित हो सकता है। इसके बावजूद, महापौर रवि लांडगे ने पीएमआरडीए की बैठक में जाते समय नियमों को दरकिनार कर 'मिसिंग लिंक' वाले पुल पर अपनी गाड़ी रुकवाई और फोटो सेशन किया। इतना ही नहीं, उन्होंने ये तस्वीरें अपने फेसबुक अकाउंट पर साझा भी कीं। इस घटना ने प्रशासन की उस चेतावनी को मजाक बनाकर रख दिया है, जिसमें कहा गया था कि सेल्फी या रील बनाने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
इस मामले के बाद सोशल मीडिया पर आम जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। नागरिक सवाल उठा रहे हैं कि यदि अब तक करीब 100 आम वाहन चालकों पर 500 रुपए का जुर्माना लगाया जा चुका है, तो इन नेताओं के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? एक्सप्रेस-वे पर 24x7 सीसीटीवी की निगरानी के बीच, जनप्रतिनिधियों का यह गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार यह संदेश देता है कि शायद कानून सिर्फ आम जनता के लिए है। जनता की मांग है कि नियम सबके लिए बराबर होने चाहिए, न कि किसी के पद या रसूख के हिसाब से।
एक्सप्रेस-वे के इस प्रोजेक्ट पर हल्के वाहनों के लिए 100 किमी/घंटा और भारी वाहनों के लिए 80 किमी/घंटा की गति सीमा तय की गई है, जहाँ अचानक वाहन रोकना किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकता है। हालाँकि महापौर की ओर से इस मामले पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है, लेकिन यह वाकया 'मिसिंग लिंक' की सुरक्षा व्यवस्था और कानून के समान पालन पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है। क्या प्रशासन आम लोगों की तरह इन नेताओं पर भी जुर्माना लगाएगा या फिर यह मामला रफा-दफा कर दिया जाएगा, यह अब सबसे बड़ा सवाल बन गया है।