पुणे न्यूज डेस्क: पुणे में कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) की सांसद Supriya Sule ने पुणे को "अपराधियों की राजधानी" बताते हुए पुलिस आयुक्त Amitesh Kumar को अनिवार्य अवकाश पर भेजने की मांग की। हाल ही में अवैध शराब त्रासदी में 21 लोगों की मौत के बाद उन्होंने पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए थे।
सांसद के आरोपों के जवाब में पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने नौ पन्नों का विस्तृत पत्र जारी कर सभी आरोपों का बिंदुवार खंडन किया। उन्होंने कहा कि पुलिस रचनात्मक आलोचना का स्वागत करती है, लेकिन गलत आंकड़ों के प्रसार से नागरिकों में भ्रम और अविश्वास पैदा होता है। उनके अनुसार इससे शहर की छवि प्रभावित होती है और पुलिस बल का मनोबल भी कमजोर पड़ता है।
पुलिस आयुक्त ने 1 जनवरी से 27 मई 2026 के बीच के आंकड़े जारी करते हुए दावा किया कि शहर में कई प्रमुख अपराधों में उल्लेखनीय कमी आई है। उनके अनुसार चेन स्नैचिंग में 56 प्रतिशत, लूट में 36 प्रतिशत, वाहन चोरी में 28 प्रतिशत, हत्या के प्रयास में 27 प्रतिशत, सेंधमारी में 14 प्रतिशत और हत्या के मामलों में 10.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि हाल में दर्ज हुई 10 हत्याओं में से 6 घरेलू विवादों से जुड़ी थीं।
अमितेश कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार पुणे देश के 19 प्रमुख महानगरों में संज्ञेय अपराधों के मामले में 18वें स्थान पर है, जो इसे अपेक्षाकृत सुरक्षित शहरों में शामिल करता है। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में 1,000 से अधिक अपराधियों पर मकोका के तहत कार्रवाई की गई, 250 लोगों पर एमपीडीए लगाया गया और 500 अपराधियों को तड़ीपार किया गया। इसके अलावा 20 करोड़ रुपये से अधिक की नशीली दवाएं जब्त की गईं और 2024 में 3,700 करोड़ रुपये के अंतरराष्ट्रीय ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ भी किया गया। पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया कि बकरीद से पहले कथित "लॉकडाउन" की अफवाहें भी पूरी तरह निराधार हैं।