पुणे न्यूज डेस्क: पुणे में एक कथित आईटी स्टार्टअप धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जिसने सैकड़ों कर्मचारियों और इंटर्न्स को मुश्किल में डाल दिया है। हिंजवड़ी स्थित थिंक टेक इंडिया (Thynk Tech India) नामक कंपनी पर आरोप है कि उसने अचानक अपना कार्यालय बंद कर दिया, जिससे करीब 700 कर्मचारी और इंटर्न बिना वेतन, सिक्योरिटी डिपॉजिट और किसी आधिकारिक सूचना के बेरोजगार हो गए। प्रभावित लोगों में बड़ी संख्या फ्रेशर्स और युवा प्रोफेशनल्स की है, जिनके लिए यह पहली नौकरी थी।
जानकारी के अनुसार, कंपनी ने वर्ष 2025 के दौरान बड़े पैमाने पर भर्ती अभियान चलाया था और इंटर्न्स को 15 हजार रुपये मासिक स्टाइपेंड का वादा किया था। शुरुआती महीनों में वेतन और स्टाइपेंड का भुगतान नियमित रूप से किया गया, जिससे कर्मचारियों का भरोसा मजबूत हुआ। हालांकि फरवरी 2026 से अचानक वेतन मिलना बंद हो गया। कर्मचारियों के अनुसार, कंपनी प्रबंधन ने आंतरिक ऑडिट का हवाला देकर भुगतान में देरी की बात कही और बार-बार नई समय-सीमा तय की, लेकिन कोई भी वादा पूरा नहीं हुआ।
कर्मचारियों का आरोप है कि परफॉर्मेंस मूल्यांकन के बाद दिए गए कई चेक बाउंस हो गए। वहीं, इंटर्न्स से जॉइनिंग के समय सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में लिए गए 15-15 हजार रुपये भी वापस नहीं किए गए। इतना ही नहीं, कंपनी से जुड़े वेंडर्स, लैपटॉप रेंटल एजेंसियां और मकान मालिक भी भुगतान न मिलने की शिकायत कर रहे हैं। प्रभावित कर्मचारियों का कहना है कि आर्थिक नुकसान के साथ-साथ इस घटना ने उनके पेशेवर भविष्य और मानसिक स्थिति पर भी गंभीर असर डाला है।
मामले को लेकर कर्मचारियों ने पुणे पुलिस और श्रम विभाग में शिकायत दर्ज कराई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी के प्रमुख हर्षल भानुदास ठाकरे ने लिखित रूप से बकाया भुगतान स्वीकार करते हुए तीन महीने के भीतर राशि लौटाने का आश्वासन दिया था। हालांकि कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें अब इस आश्वासन पर भरोसा नहीं है। फिलहाल कार्यालय बंद है और पुलिस तथा श्रम विभाग मामले की जांच कर रहे हैं।