पुणे न्यूज डेस्क: पुणे में डेंगू से एक बच्ची की संदिग्ध मौत के तीन दिन बाद बुधवार को नगरसेवकों ने पुणे महानगरपालिका (पीएमसी) पर मच्छरों के पनपने और उनसे फैलने वाले संक्रमण को रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाया। हालांकि, महानगरपालिका के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि बीमारी से बचाव के लिए कदम तेज कर दिए गए हैं।
लोहेगांव की आठ साल की एक बच्ची की रविवार को रूबी हॉल क्लिनिक में संदिग्ध डेंगू से मौत हो गई थी। अस्पताल की ओर से जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, बच्ची को चार से पांच दिनों तक बुखार और पेट में दर्द की शिकायत थी। जांच में डेंगू की पुष्टि हुई थी। गंभीर हालत में अस्पताल लाई गई बच्ची को तेज शॉक लगा और उसके लिवर व किडनी पर असर पड़ा। इसके बाद शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया।
इस साल डेंगू के 2,413 मामले
पुणे में 1 जनवरी से 20 अक्टूबर 2026 के बीच डेंगू के 2,413 मामले सामने आए हैं। इनमें अगस्त में 568, सितंबर में 726 और अक्टूबर में 553 मामले दर्ज किए गए। बीमारी की जल्द पहचान के लिए महानगरपालिका ने अपने सभी डिस्पेंसरी सेंटरों पर रैपिड डायग्नोस्टिक किट (आरडीके) मुफ्त उपलब्ध कराई हैं। एक अधिकारी ने बताया कि डेंगू की पुष्टि के लिए डॉ. नायडू अस्पताल, डॉ. कोटनिस अस्पताल और कमला नेहरू अस्पताल जैसे केंद्रों पर जांच की सुविधा भी रखी गई है।
डेंगू के मरीजों के लिए बेड और इलाज की व्यवस्था
डॉ. नायडू अस्पताल में डेंगू के मरीजों के लिए 50 बेड रखे गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, आमतौर पर इनमें से 10 से 15 बेड पर ही मरीज भर्ती रहते हैं। यहां मरीजों का इलाज मुफ्त किया जा रहा है। सहायक चिकित्सा अधिकारी राजेश दिघे ने बताया कि महानगरपालिका की टीमों को उन इलाकों में कीटनाशक छिड़काव और बचाव के उपायों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं, जहां संक्रमण का खतरा ज्यादा है। उन्होंने कहा कि फॉगिंग प्रभावित घरों और उनके आसपास की बंद जगहों में की जा रही है, न कि बिना जरूरत खुले इलाकों में हर जगह छिड़काव किया जा रहा है।
महानगरपालिका ने लोगों से घबराने की बजाय उपलब्ध इलाज की सुविधाओं का इस्तेमाल करने की अपील की है। उसके मुताबिक, निजी अस्पतालों में डेंगू के इलाज के लिए कुल 4,409 बेड हैं, जिनमें 670 आईसीयू बेड शामिल हैं। वहीं, सरकारी अस्पतालों में 333 बेड उपलब्ध हैं, जिनमें छह आईसीयू बेड हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इन बेड में से करीब 50 फीसदी खाली हैं। उन्होंने लोगों से यह भी अपील की कि वे इलाज के लिए सिर्फ कुछ बड़े और मशहूर अस्पतालों में ही भर्ती होने की जिद न करें।
14 लाख घरों की जांच, 6.3 लाख रुपये का जुर्माना
मच्छरों के पनपने पर रोक लगाने के लिए महानगरपालिका की टीमों ने अब तक करीब 14 लाख घरों और पानी जमा करने वाले 28.31 लाख कंटेनरों की जांच की है। इस दौरान 13,000 घरों में 18,885 कंटेनरों में एडीज मच्छर के लार्वा पाए गए। ये मच्छर डेंगू फैलाने के लिए जिम्मेदार होते हैं। इस साल अब तक मच्छरों के पनपने से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने पर 2,664 संपत्तियों को नोटिस जारी किए गए हैं और 6.3 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया है।