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महाराष्ट्र में फर्जी एसटी प्रमाणपत्र घोटाला, राज्यभर में जांच के आदेश

Photo Source : Google

Posted On:Friday, April 3, 2026

पुणे न्यूज डेस्क: महाराष्ट्र में फर्जी अनुसूचित जनजाति (एसटी) जाति वैधता प्रमाणपत्रों के जरिए प्रतिष्ठित कॉलेजों में प्रवेश दिलाने वाले बड़े घोटाले का खुलासा होने के बाद अब इसकी जांच पूरे राज्य में फैल गई है। नागपुर और पुणे से शुरू हुआ यह मामला अब राज्यव्यापी जांच का रूप ले चुका है। सरकार ने आरक्षित कोटे के तहत हुए सभी संदिग्ध प्रवेशों की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।

घोटाले के सामने आते ही State Common Entrance Test Cell Maharashtra (राज्य सामायिक प्रवेश परीक्षा कक्ष महाराष्ट्र) ने संदिग्ध आवेदनों की दोबारा जांच शुरू कर दी है। तकनीकी और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में एसटी कोटे के तहत हुए दाखिलों की गहन पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी भी छात्र के दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं, तो उसका प्रवेश तुरंत रद्द किया जाएगा।

दूसरी ओर Tribal Development Department Maharashtra (महाराष्ट्र आदिवासी विकास विभाग) का सतर्कता दल भी सक्रिय हो गया है। राज्य के सभी कॉलेजों को निर्देश दिए गए हैं कि वे एसटी श्रेणी के छात्रों के जाति वैधता प्रमाणपत्रों का मूल दस्तावेजों से मिलान कर रिपोर्ट सौंपें। जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस पूरे नेटवर्क में कुछ सरकारी कर्मचारियों की भी मिलीभगत हो सकती है, इसलिए जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।

नागपुर में इस मामले में 50 से ज्यादा छात्रों की पहचान हुई है, जिन्होंने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इंजीनियरिंग समेत अन्य कोर्सेज में प्रवेश लिया। इस मामले में पुलिस ने 11 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, जिनमें एक सहायक प्रोफेसर भी शामिल है। जांच में सामने आया है कि छात्रों से 2 से 3 लाख रुपये लेकर उन्हें फर्जी प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए जाते थे।

यह घोटाला मुख्य रूप से Govindrao Wanjari College of Engineering and Technology (गोविंदराव वंजारी अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, नागपुर) से उजागर हुआ, जहां बड़ी संख्या में फर्जी प्रमाणपत्र पाए गए। इसके बाद पुणे के कुछ प्रतिष्ठित महाविद्यालय भी जांच के घेरे में आ गए हैं। इस फर्जीवाड़े के कारण असली और पात्र आदिवासी छात्रों के अधिकारों पर सीधा असर पड़ा है, जिससे समाज में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।


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