पुणे न्यूज डेस्क: कोनी स्थित शासकीय कुक्कुट प्रक्षेत्र में बर्ड फ्लू की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य और पशुपालन विभाग पूरी तरह अलर्ट हो गया है। एहतियात के तौर पर प्रक्षेत्र से जुड़े 24 कर्मचारियों के स्वाब सैंपल लिए गए हैं, जिनमें जेडी और डॉक्टर भी शामिल हैं। इनमें से 10 संदिग्ध सैंपल सिम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभाग और 14 सैंपल रायपुर एम्स जांच के लिए भेजे गए हैं। साथ ही तीन पोल्ट्री फार्मों से 6 मुर्गियों के सैंपल भी पुणे भेजे गए हैं।
कर्मचारियों की जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जरूरत पड़ने पर अन्य लोगों की भी जांच कराई जाएगी। जिला सर्विलेंस अधिकारी डॉ. प्रमोद तिवारी के अनुसार स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। वहीं सिम्स के डीन डॉ. रमणेश मूर्ति ने बताया कि संदिग्ध सैंपलों की जांच आरटीपीसीआर तकनीक से की जाएगी और रिपोर्ट जल्द आने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि बर्ड फ्लू इंसानों में कम फैलता है, लेकिन संक्रमण होने पर गंभीर साबित हो सकता है।
संक्रमण की पुष्टि के बाद प्रक्षेत्र में बड़े स्तर पर कार्रवाई की गई है। अब तक 22,808 पक्षियों, 25,896 अंडों और 79 क्विंटल दाने को वैज्ञानिक तरीके से नष्ट किया जा चुका है। इसके अलावा वेटनरी कॉलेज की 1900 मुर्गियों को भी खत्म किया गया है। प्रशासन ने एक किलोमीटर के दायरे में आने वाले घरों से भी मुर्गियां नष्ट कराई हैं और 10 किलोमीटर तक के क्षेत्र को संक्रमित घोषित कर चिकन और अंडों की बिक्री पर रोक लगा दी है।
प्रतिबंध के बावजूद अवैध बिक्री की शिकायतें सामने आ रही हैं। कंट्रोल रूम में अब तक 23 शिकायतें दर्ज की गई हैं, जिनमें मुर्गियों की मौत और चिकन-अंडों की अवैध बिक्री शामिल है। साथ ही कोनी प्रक्षेत्र से मुंगेली, जीपीएम, कोरबा, सक्ती और जांजगीर-चांपा जिलों में सप्लाई किए गए चूजों की भी जांच के निर्देश दिए गए हैं। पशुपालन विभाग के अनुसार एहतियात के तौर पर सभी प्रभावित और संभावित क्षेत्रों में सैंपल जांच और निगरानी तेज कर दी गई है।