पुणे न्यूज डेस्क: भारत में मधुमेह और मोटापे के बढ़ते मामलों के बीच GLP-1 (ग्लूकागन-लाइक पेप्टाइड-1) रिसेप्टर एगोनिस्ट दवाओं को बड़ी चिकित्सीय सफलता माना जा रहा है। ये इंजेक्टेबल दवाएं भूख और ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करती हैं और तेजी से वजन घटाने में असरदार साबित हुई हैं। लेकिन विश्व मोटापा दिवस (4 मार्च) के मौके पर विशेषज्ञों ने इनके अनियंत्रित उपयोग को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
जनवरी में सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गेनाइजेशन (CDSCO) की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि इन दवाओं को केवल पंजीकृत एंडोक्रिनोलॉजिस्ट द्वारा ही प्रिस्क्राइब किया जाए। बढ़ती मांग के चलते बाजार में कई जेनेरिक विकल्प सामने आए हैं, जिससे दुरुपयोग की आशंका भी बढ़ गई है।
सीमा काशीवा , निदेशक, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर डायबिटीज एंड ओबेसिटी, नोबल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर , का कहना है कि सेमाग्लूटाइड जैसी दवाएं तभी सुरक्षित हैं जब इन्हें चिकित्सकीय निगरानी में लिया जाए। बिना सलाह के लेने पर गंभीर साइड इफेक्ट्स सामने आ सकते हैं।
वहीं संदीप खरब, सीनियर कंसल्टेंट, एशियन हॉस्पिटल, ने चेताया कि कॉस्मेटिक वजन घटाने के लिए इन दवाओं का इस्तेमाल खतरनाक हो सकता है। राकेश पंडित, हेड, इंटरनल मेडिसिन, आकाश हेल्थकेयर, ने भी कहा कि थेरेपी शुरू करने से पहले लिवर, किडनी और पैंक्रियाज की जांच जरूरी है।
हालांकि मुकेश बुधवानी, सीनियर फिजिशियन, अपोलो क्लिनिक, का मानना है कि इन दवाओं ने मोटापे को लेकर सोच बदली है और सही मरीजों में यह हृदय स्वास्थ्य व मेटाबॉलिक सुधार में मददगार हैं।