पुणे न्यूज डेस्क: पुणे के प्रतिष्ठित आईएलएस लॉ कॉलेज (ILS Law College) में रैगिंग का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ द्वितीय वर्ष के एक छात्र ने अपने पांच सीनियर्स पर मानसिक उत्पीड़न और डराने-धमकाने का आरोप लगाया है। इस मामले में पुणे की डेक्कन थाना पुलिस ने महाराष्ट्र एंटी-रैगिंग एक्ट की धारा 3 और 4 के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
घटना का विवरण और उत्पीड़न के आरोप:
पीड़ित छात्र, जो घटना के समय एलएलबी प्रथम वर्ष में था, ने अपनी शिकायत में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। छात्र के अनुसार, उत्पीड़न की शुरुआत तब हुई जब उसने हॉस्टल परिसर में धूम्रपान करने पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद सीनियर्स ने उसे निशाना बनाना शुरू कर दिया:
मानसिक प्रताड़ना: छात्र को गाली-गलौज और लगातार मानसिक तनाव दिया गया।
अमानवीय व्यवहार: पीड़ित ने आरोप लगाया कि उसे उसके कमरे में बंद कर दिया जाता था, उसके दरवाजे पर अंडे फेंके जाते थे और बाहर गुटखा थूका जाता था।
बुनियादी अधिकारों पर रोक: छात्र को रात में सोने नहीं देने के लिए तेज संगीत बजाया जाता था और यहाँ तक कि उसे वॉशरूम जाने से भी रोका जाता था।
कॉलेज प्रशासन और छात्र के बीच मतभेद:
इस मामले में कॉलेज प्रशासन और पीड़ित छात्र के बयानों में बड़ा विरोधाभास देखने को मिल रहा है:
प्रशासन का पक्ष: कॉलेज का कहना है कि यह मामला 2024 के पुराने विवाद से जुड़ा है। यूजीसी (UGC) के दिशानिर्देशों के तहत एंटी-रैगिंग समिति ने जांच की थी, लेकिन उन्हें प्रथम दृष्टया रैगिंग का कोई सबूत नहीं मिला। संस्थान ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट यूजीसी को भी भेज दी थी।
छात्र का पक्ष: पीड़ित छात्र कॉलेज की आंतरिक जांच से संतुष्ट नहीं था। उसका दावा है कि इस उत्पीड़न के कारण वह सामाजिक रूप से कट गया और उसके शैक्षणिक प्रदर्शन पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ा। इसी कारण उसने कानूनी रास्ता अपनाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस की कार्रवाई:
डेक्कन थाना पुलिस अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि क्या कॉलेज प्रशासन ने शिकायत मिलने के बाद उचित कदम उठाए थे। पुलिस ने बताया कि छात्र द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। रैगिंग के खिलाफ सख्त कानूनों को देखते हुए, आरोपी छात्रों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की संभावना है।