पुणे न्यूज डेस्क: कोटा के चंद्रसेल मठ में युवा संत देवानंद महाराज की हत्या के मामले में पुलिस ने जांच तेज करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक नाबालिग को निरुद्ध किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में आदित्य वर्मा, अंकित बैरवा और आदित्य की पत्नी माइकल जॉर्ज शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, घटना के बाद आरोपी लगातार संपर्क में थे और लोकेशन छिपाने के लिए वीपीएन नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे थे। मामले में पहले से गिरफ्तार वकील संतोष राय और पुष्पेंद्र सिंह उर्फ प्रिंस से भी पूछताछ जारी है।
कोटा शहर एसपी तेजस्विनी गौतम ने बताया कि आदित्य वर्मा ने संतोष राय के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची थी और अपने रिश्तेदार अंकित बैरवा को भी इसमें शामिल किया। वारदात के बाद आरोपी अपने घर पहुंचे, जहां उनके खून से सने कपड़ों को माइकल जॉर्ज ने साफ किया। पुलिस का कहना है कि माइकल को पूरी साजिश और घटनाक्रम की जानकारी थी, इसलिए उसे भी आरोपी बनाया गया है।
जांच में सामने आया है कि हत्या के बाद आरोपी पहले जयपुर पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात संतोष राय से हुई। इसके बाद वे दिल्ली होते हुए महाराष्ट्र और फिर गोवा जाने की तैयारी में थे। पुलिस का दावा है कि आरोपी वहां छिपने के साथ-साथ मौज-मस्ती की भी योजना बना रहे थे। हालांकि, कोटा पुलिस की सूचना पर पुणे ग्रामीण पुलिस ने दौंड स्टेशन के पास उन्हें पकड़ लिया। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आरोपियों को वारदात के लिए एक लाख रुपये की रकम मिली थी, जबकि अन्य भुगतान और साजिश से जुड़े पहलुओं की जांच अभी जारी है।
इस मामले में पुलिस ने मठ के संत नंदनवन और चौकीदार महावीर पारेता को भी गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, नंदनवन ट्रस्ट विवाद के चलते बनाई गई साजिश का हिस्सा था और उसे बताया गया था कि देवानंद महाराज को केवल घायल करना है तथा घटना को चोरी का रूप देना है। वहीं चौकीदार महावीर पारेता पर आरोप है कि उसने आरोपियों को मठ की पूरी जानकारी, रास्ते और संतों की कुटियाओं की स्थिति बताकर मदद की। पुलिस को आशंका है कि इस साजिश में कुछ और लोग भी शामिल हो सकते हैं, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है।