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सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व ट्रेनी IAS पूजा खेडकर की गिरफ्तारी पर लगी रोक 17 मार्च तक बढ़ाई, जानिए पूरा मामला

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Posted On:Friday, February 14, 2025

मुंबई, 14 फरवरी, (न्यूज़ हेल्पलाइन)। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व ट्रेनी IAS पूजा खेडकर की गिरफ्तारी पर लगी रोक 17 मार्च तक बढ़ा दी। कोर्ट ने 15 जनवरी को हुई पिछली सुनवाई में गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने खेडकर को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी। खेडकर की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कोर्ट में बताया कि हमलोग जांच में सहयोग कर रही हैं लेकिन पुलिस ने उन्हें पूछताछ के लिए नहीं बुलाया है। सुप्रीम कोर्ट ने पूजा की अग्रिम जमानत अर्जी पर जवाब देने के लिए दिल्ली पुलिस को दिया गया समय भी बढ़ा दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने पूजा की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। पूजा खेडकर पर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) परीक्षा पास करने के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और दिव्यांगता कोटे से आरक्षण लेने के लिए धोखाधड़ी करने का आरोप है।

तो वहीं, पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट का 23 दिसंबर 2024 का आदेश पलट दिया था। पूजा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा था कि हाईकोर्ट के आदेश में कुछ ऐसी टिप्पणी हैं जो ट्रायल शुरू होने पर पूजा के खिलाफ प्रयोग हो सकते हैं। इस पर बेंच ने UPSC और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने पूजा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कड़ी टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि यह न केवल एक संवैधानिक निकाय के साथ बल्कि समाज और पूरे देश के साथ धोखाधड़ी है। हाईकोर्ट ने माना था कि पूजा के माता-पिता बड़े पदों पर थे। इससे प्रभावशाली व्यक्तियों से मिलीभगत की आशंका का संकेत मिलता है। इससे पहले दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 1 अगस्त, 2024 को पूजा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद पूजा दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची थीं।

आपको बता दें, पूजा पुणे में ट्रेनी अफसर की ट्रेनिंग कर रही थीं। इस दौरान उन पर सुविधाएं मांगने का आरोप लगा। एक वरिष्ठ अधिकारी के चैंबर पर कब्जा करने की शिकायत भी सामने आई। उन्होंने अपनी निजी ऑडी कार में लाल बत्ती और ‘महाराष्ट्र सरकार’ की प्लेट लगवाई। पुणे के डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर सुहास दिवासे ने पूजा के खिलाफ शिकायत की थी, जिसके बाद उनका ट्रांसफर वाशिम कर दिया गया। इसके बाद मामले की जांच की गई तो पता चला कि उन्होंने UPSC में सिलेक्शन पाने के लिए फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल किया। जांच आगे बढ़ी तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।

विकलांगता सर्टिफिकेट में पूजा खेडकर का एड्रेस ‘प्लॉट नंबर 53, देहू अलंदी रोड, तलावडे, पिंपरी चिंचवाड़, पुणे’ लिखा गया था। जबकि इस एड्रेस पर कोई घर नहीं, थर्मोवर्टा इंजीनियरिंग कंपनी नाम की एक फैक्ट्री है। पूजा की जिस ऑडी को जब्त किया गया था, वह इसी कंपनी के नाम पर रजिस्टर थी। सरकारी नियमों के तहत विकलांगता सर्टिफिकेट बनाने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य है, लेकिन पूजा के सर्टिफिकेट में राशन कार्ड लगाया गया था। विकलांग कोटे से UPSC में सिलेक्शन की जांच होने पर पूजा के कई विकलांगता सर्टिफिकेट सामने आए। पूजा ने 2018 और 2021 में अहमदनगर डिस्ट्रिक्ट सिविल हॉस्पिटल से जारी 2 अलग सर्टिफिकेट UPSC को सौंपे थे। पूजा ने अपनी विकलांगता सर्टिफिकेट की पुष्टि के लिए दिल्ली में मेडिकल जांच के लिए कई बार अपॉइंटमेंट लिया, लेकिन बाद में एक प्राइवेट हॉस्पिटल की रिपोर्ट UPSC में जमा की। यशवंत राव चह्वाण मेमोरियल अस्पताल ने साफ कर दिया कि पूजा का लोकोमीटर सर्टिफिकेट बनाने में कोई गलती नहीं हुई। सर्टिफिकेट में पूजा को 7% लोकोमीटर डिसेबिलिटी बताई गई थी। अस्पताल को पिंपरी चिंचवाड नगर निगम संचालित करता है। पूजा ने UPSC को दिए एक हलफनामे में दावा किया था कि वह मानसिक रूप से अक्षम हैं और उन्हें देखने में भी दिक्कत होती है। पूजा ने मेडिकल टेस्ट देने से 6 बार मना किया था, जबकि मेडिकल टेस्ट देना जरूरी होता है। कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूजा का पहला मेडिकल टेस्ट दिल्ली AIIMS में अप्रैल 2022 में शेड्यूल हुआ था। उन्होंने कोविड पॉजिटिव होने का हवाला देकर इसमें शामिल होने से मना कर दिया था।


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