पुणे न्यूज डेस्क: हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर की दया याचिकाओं को लेकर चल रहे मानहानि मामले में सोमवार को पुणे की अदालत में उनके प्रपौत्र सत्यकी सावरकर ने बयान दिया। उन्होंने बताया कि सावरकर ने ब्रिटिश सरकार के सामने सजा कम करने के लिए 10 बार दया याचिकाएं दायर की थीं। यह बयान कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मानहानि मुकदमे की सुनवाई के दौरान दिया गया।
सत्यकी सावरकर ने विशेष न्यायाधीश अमोल शिंदे के सामने जिरह के दौरान कहा कि सावरकर की दया याचिकाओं के रिकॉर्ड सरकारी अभिलेखागार में मौजूद हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सावरकर ने सजा सुनाए जाने के करीब एक महीने बाद पहली याचिका दाखिल की थी। हालांकि, उन्होंने कहा कि दया याचिका दाखिल करना उस समय ब्रिटिश शासन की एक सामान्य प्रक्रिया थी और इसे गैरकानूनी नहीं माना जा सकता था।
जिरह के दौरान सत्यकी सावरकर ने यह भी माना कि कई अन्य स्वतंत्रता सेनानियों जैसे भगत सिंह, बटुकेश्वर दत्त, राजगुरु और अशफाकउल्ला खान ने ब्रिटिश सरकार के सामने दया याचिका नहीं दी थी। उन्होंने कहा कि भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त अपने विचारों और सिद्धांतों पर अंत तक कायम रहे।
सत्यकी सावरकर ने हालांकि इस दावे को खारिज किया कि दया याचिकाएं दाखिल करना सावरकर की “वीर” छवि के विपरीत था। उन्होंने कहा कि सावरकर की सभी याचिकाओं को ब्रिटिश सरकार ने अस्वीकार कर दिया था और अंग्रेजों को डर था कि रिहाई के बाद वह दोबारा क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। यह मामला 2023 में लंदन में राहुल गांधी द्वारा सावरकर को लेकर दिए गए कथित आपत्तिजनक बयान से जुड़ा है।