पुणे न्यूज डेस्क: महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) आयुक्त तुकाराम हरिभाऊ मुंढे को पुणे में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान लोगों ने खड़े होकर जोरदार तालियों से सम्मान दिया। कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जैसे ही मुंढे मंच पर पहुंचे, पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
यह सम्मान ऐसे समय मिला है, जब महाराष्ट्र FDA खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले रेस्टोरेंट और खाद्य कारोबारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहा है। मुंढे के नेतृत्व में विभाग ने मुंबई समेत राज्य के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर जांच अभियान चलाया है। साफ-सफाई और खाद्य सुरक्षा मानकों में लापरवाही मिलने पर करीब 100 रेस्टोरेंट और खाद्य प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं।
मंच पर पहुंचते ही खड़े हुए लोग
पुणे के बाल गंधर्व रंग मंदिर में आयोजित कार्यक्रम का एक वीडियो सामने आया है। इसमें देखा जा सकता है कि मुंढे के मंच की ओर बढ़ते ही कई लोग अपनी सीटों से खड़े हो गए। लोगों ने देर तक तालियां बजाईं और कई दर्शकों ने इस पल को अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड किया।
FDA की हालिया कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर भी मुंढे की सख्त कार्यशैली की काफी चर्चा हो रही है। कई लोग खाद्य कारोबारियों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई को जरूरी बताते हुए उनकी सराहना कर रहे हैं।
किसान परिवार से UPSC तक का सफर
तुकाराम मुंढे का जन्म महाराष्ट्र के बीड जिले के एक किसान परिवार में हुआ। उनके पिता हरिभाऊ मुंढे किसान थे, जबकि उनकी मां आसराबाई मुंढे घर संभालती थीं। आर्थिक चुनौतियों के बीच मुंढे ने पढ़ाई जारी रखी और स्कूल के साथ परिवार के खेती के काम में भी हाथ बंटाया।
उन्होंने औरंगाबाद स्थित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा हासिल की। इसके बाद 2004 में UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास की और ऑल इंडिया रैंक 20 हासिल की। वह 2005 बैच के महाराष्ट्र कैडर के IAS अधिकारी बने।
कई अहम पदों पर कर चुके हैं काम
करीब दो दशक के प्रशासनिक करियर में मुंढे ने राज्य के कई महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी संभाली है। वह असिस्टेंट कलेक्टर, जिला कलेक्टर, नगर आयुक्त और पुणे महानगर परिवहन महामंडल लिमिटेड (PMPML) के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर जैसे पदों पर काम कर चुके हैं।
उनकी पोस्टिंग नांदेड, वाशिम, जालना, सोलापुर, नवी मुंबई, नासिक, नागपुर और पुणे समेत कई जगहों पर रही है। सोलापुर कलेक्टर रहते हुए जल संरक्षण और प्रशासनिक सुधारों के लिए उन्हें खास पहचान मिली। 2015-16 में उन्हें महाराष्ट्र सरकार का बेस्ट डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर अवॉर्ड भी मिला और उन्हें 'वॉटरमैन ऑफ महाराष्ट्र' के नाम से जाना जाने लगा।
बार-बार तबादलों के लिए भी चर्चा में रहे
मुंढे की सख्त प्रशासनिक शैली के कारण उनके तबादले भी अक्सर चर्चा में रहे हैं। उनके समर्थकों का मानना है कि नियमों के पालन और अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई के कारण उन्हें बार-बार ट्रांसफर किया गया, जबकि आलोचक उनकी कार्यशैली को काफी सख्त बताते रहे हैं।
करीब दो दशक से ज्यादा के करियर में उनके करीब 25 बार तबादले होने की बात कही जाती है। इसके बावजूद वह अपनी स्पष्ट कार्यशैली और नियमों के सख्त पालन को लेकर लगातार सुर्खियों में बने रहे हैं।