पुणे न्यूज डेस्क: पुणे एयरपोर्ट के आसपास बढ़ते पक्षियों के खतरे को लेकर पुणे नगर निगम ने स्थानीय लोगों और एयरपोर्ट आने-जाने वाले यात्रियों द्वारा खुले में कचरा फेंकने को बड़ी वजह बताया है। साल 2020 से 2025 के बीच पुणे एयरपोर्ट पर पक्षियों से जुड़े करीब 5,700 मामले सामने आए, जिनमें रनवे के आसपास पक्षियों की मौजूदगी के कारण उड़ानों में देरी और अन्य बाधाएं शामिल रहीं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2025 में 32 और 2024 में 39 बर्ड स्ट्राइक की घटनाएं दर्ज की गईं।
नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने कहा कि समस्या के समाधान के लिए अगले सप्ताह एक जरूरी बैठक बुलाई गई है। इसमें पुणे नगर निगम, एयरपोर्ट प्राधिकरण और भारतीय वायुसेना के प्रतिनिधि शामिल होंगे। नगर निगम के कचरा प्रबंधन विभाग के प्रमुख संतोष वरुले के अनुसार, एयरपोर्ट के आसपास सफाई के लिए 15 कर्मचारियों की टीम तैनात की गई है, लेकिन कई लोग कारों से कचरा खुले में फेंक देते हैं। कचरे और आसपास मौजूद जल स्रोतों के कारण पक्षी बड़ी संख्या में एयरफील्ड के आसपास पहुंच रहे हैं।
भारतीय वायुसेना के अधिकारियों के मुताबिक, काली चील और करीब 20 अन्य पक्षी प्रजातियां पुणे एयरफोर्स स्टेशन पर उड़ान संचालन के लिए लगातार खतरा बनी हुई हैं। खासतौर पर मानसून के दौरान और उसके बाद खुले इलाकों में कीड़े और भोजन मिलने के कारण पक्षियों की संख्या बढ़ जाती है। काली चील करीब 1 किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़ सकती हैं, जिससे विमान संचालन के लिए खतरा और बढ़ जाता है। अधिकारियों के अनुसार, तेज आवाज और ड्रोन के जरिए पक्षियों को भगाने की कोशिश भी ज्यादा प्रभावी नहीं रही।
पिछले साल जून में रनवे के पास असामान्य रूप से पक्षियों की गतिविधि के कारण पुणे आने वाली एक फ्लाइट को सूरत डायवर्ट करना पड़ा था। इसी महीने एयर इंडिया की एक फ्लाइट में बर्ड स्ट्राइक की घटना सामने आई थी, जबकि हैदराबाद जाने वाली इंडिगो फ्लाइट के यात्रियों को बर्ड स्ट्राइक के बाद करीब छह घंटे तक विमान में इंतजार करना पड़ा। अक्टूबर में पुणे से दिल्ली पहुंची अकासा एयर की एक फ्लाइट में भी बर्ड स्ट्राइक की घटना दर्ज हुई थी। अब एयरपोर्ट के आसपास कचरा प्रबंधन और पक्षियों को दूर रखने के लिए ठोस कदम उठाने पर जोर दिया जा रहा है।