पुणे न्यूज डेस्क: महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और गड़बड़ियों को लेकर सोमवार को पुणे में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी ओंकारेश्वर मंदिर चौक से मार्च करते हुए पुणे जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की। साथ ही एमपीएससी के चेयरमैन और सचिव के इस्तीफे की मांग करते हुए इन पदों पर साफ छवि वाले अधिकारियों की नियुक्ति की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने ड्रग इंस्पेक्टर (ग्रुप-बी) परीक्षा के पेपर लीक मामले में आठ दिनों के भीतर आपत्तियों पर जवाब देने और कथित गड़बड़ियों की जांच कराने की मांग की। इसके अलावा 2025 की स्टेट सर्विसेज मेन परीक्षा और एग्रीकल्चर सर्विसेज परीक्षा में डिस्क्रिप्टिव पेपर की जांच में कथित गलतियों की भी जांच की मांग उठाई गई। अभ्यर्थियों ने मुंबई क्राइम ब्रांच की ओर से एमपीएससी को सौंपी गई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग भी की।
पेपर लीक मामले में मुंबई पुलिस अब तक सात लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें परीक्षा में सातवीं रैंक हासिल करने वाली एक महिला अभ्यर्थी भी शामिल है। प्रदर्शनकारियों ने गिरफ्तार एमपीएससी अंडर सेक्रेटरी अभिजीत लेंडवे के कार्यकाल में हुई सभी परीक्षाओं का फोरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की। साथ ही लेंडवे और दो अन्य आरोपियों, एमपीएससी के असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर विश्वेश्वर दत्तात्रेय नाकाटे और गोपाल भट्टू मराठे की नौकरी से जुड़े रिकॉर्ड और प्रमोशन की प्रक्रिया की भी जांच की मांग की गई। अभ्यर्थियों ने आरोपियों के संपर्क में रहे चयनित उम्मीदवारों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड और कथित एजेंटों की भूमिका की जांच की मांग भी रखी।
एमपीएससी चेयरमैन विवेक भीमनवार के मुताबिक, ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा का पेपर लीक उनके आयोग का पदभार संभालने से पहले हुआ था। उन्होंने बताया कि ऐसी घटनाओं को दोबारा रोकने के लिए आयोग ने एक हाईलेवल इंटरनल कमेटी बनाई है, जबकि राज्य सरकार ने भी परीक्षा प्रक्रिया में सुधार के लिए अलग कमेटी गठित की है। प्रदर्शनकारियों ने 25 अक्टूबर 2026 को होने वाली ग्रुप-सी क्लर्क और टाइपिस्ट प्रारंभिक परीक्षा को पूरी पारदर्शिता के साथ कराने और स्टेनोग्राफर पद को फिर से शुरू करने की मांग की। एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार और कांग्रेस विधायक विश्वजीत कदम ने भी प्रदर्शन में पहुंचकर अभ्यर्थियों का समर्थन किया। रोहित पवार ने कहा कि यह राजनीतिक आंदोलन नहीं, बल्कि सभी एमपीएससी अभ्यर्थियों का आंदोलन है।