पुणे न्यूज डेस्क: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पुणे स्थित 'यशदा' में सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी शिवाजीराव देशमुख की पुस्तक ‘आठवणींची ओंजळ’ का विमोचन किया।
इस कार्यक्रम के दौरान शरद पवार ने राजनीतिक नेताओं को प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बेहतर संवाद बनाए रखने की सलाह दी, जबकि नितिन गडकरी ने राजनीति में अपने स्पष्टवादी रवैये को लेकर अनुभव साझा किए।
संबोधन के प्रमुख बिंदु:
प्रशासन के साथ संवाद आवश्यक (शरद पवार): शरद पवार ने कहा कि सारा ज्ञान किसी एक व्यक्ति के पास नहीं होता, इसके लिए प्रशासनिक अधिकारियों के साथ निरंतर संवाद जरूरी है। उन्होंने महाराष्ट्र की प्रशासनिक व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि अधिकारियों के साथ तालमेल से नियमों के दायरे में रहकर काम पूरा करने का तरीका सीखा जा सकता है।
रक्षा मंत्री के रूप में अनुभव: शरद पवार ने याद किया कि जब उन्होंने रक्षा मंत्री का पदभार संभाला था, तब उन्हें सेना की रैंक प्रणाली के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। इसके बाद उन्होंने कोल्हापुर जाकर जनरल थोरात से लगातार तीन दिनों तक भारतीय सेना की संरचना और सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को समझा था।
वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट में योगदान: शिवाजीराव देशमुख के प्रशासनिक योगदान की सराहना करते हुए पवार ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद उनके महानिदेशक पद संभालने के कारण ही वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट शक्कर उद्योग के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर एक मार्गदर्शक संस्था बन सका।
राजनीति में सच बोलना कठिन (नितिन गडकरी): नितिन गडकरी ने अपने खास अंदाज में कहा कि राजनीति में स्पष्ट और सच बोलने को आसानी से स्वीकार नहीं किया जाता। आमतौर पर 'देखते हैं, करते हैं' जैसी भाषा इस्तेमाल की जाती है, लेकिन उनका स्वभाव साफ-साफ बोलने का रहा है, जिस वजह से कार्यकर्ता अक्सर उनसे दूरी बनाकर रखते थे।