पुणे न्यूज डेस्क: सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय (एसपीपीयू) में सामने आए कथित फर्जी डिग्री और मार्कशीट मामले को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने कुलपति से मुलाकात कर पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की। मुलाकात के बाद उन्होंने दावा किया कि यह सिर्फ एक कर्मचारी का मामला नहीं, बल्कि इसके पीछे बड़ा नेटवर्क हो सकता है।
रोहित पवार ने कहा कि विश्वविद्यालय कर्मचारी अतुल मुखेकर को निलंबित करने और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से मामला खत्म नहीं हो जाता। उनका आरोप है कि वर्ष 2016 से संबंधित विभाग में कार्यरत एक कर्मचारी अकेले इतने बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि वर्ष 2015 से अब तक विश्वविद्यालय द्वारा जारी सभी डिग्रियों, पीआरएन, एनरोलमेंट और सीट नंबर का ऑडिट कराया जाए। साथ ही आरोपी का मोबाइल जब्त कर उसकी डिजिटल फॉरेंसिक जांच, व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्ड की भी जांच की जाए, ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
रोहित पवार ने विश्वविद्यालय से जुड़ी 'एज्युटेक फाउंडेशन' और 'रिसर्च पार्क फाउंडेशन' जैसी सेक्शन-8 कंपनियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि डेटा प्रबंधन और डिग्री प्रिंटिंग से जुड़े काम की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कुछ लोगों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की।
विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले को उजागर करने वाले छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर दबाव बनाया जा रहा है। उनके अनुसार, शिकायतकर्ताओं को धमकी भरे फोन आ रहे हैं और उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने ऐसे लोगों को सुरक्षा देने की मांग की।
रोहित पवार ने कहा कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन किया जाएगा। हालांकि, उनके ये आरोप हैं और मामले की जांच अभी जारी है।