पुणे न्यूज डेस्क: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को भारतीय रेलवे के भविष्य और हाई-स्पीड रेल (HSR) गलियारों को लेकर कई बड़े ऐलान किए। उन्होंने बताया कि सरकार 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर काम कर रही है, जो न केवल यात्रा का समय घटाएंगे बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में भी बड़ा बदलाव लाएंगे।
प्रमुख घोषणाएं और निवेश:
भारी निवेश: इन 7 नए गलियारों के निर्माण में 16 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। यह पूरा काम भारतीय कंपनियों और निर्माताओं द्वारा किया जाएगा क्योंकि डिजाइन और निर्माण का मानकीकरण (Standardization) कर लिया गया है।
यात्रा समय में क्रांतिकारी कमी:
मुंबई-अहमदाबाद: यात्रा का समय घटकर मात्र 1 घंटा 57 मिनट रह जाएगा।
मुंबई-पुणे: अब केवल 48 मिनट में सफर पूरा होगा।
पुणे-हैदराबाद: यह दूरी मात्र 1 घंटा 55 मिनट में तय की जा सकेगी।
हवाई सफर को चुनौती: मंत्री ने कहा कि इतनी कम समय सीमा के कारण इन रूटों पर रेलवे का 99% वर्चस्व होगा और एयरलाइंस इन क्षेत्रों की प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाएंगी।
रेलवे की प्रगति के आंकड़े:
बजट में बढ़ोतरी: भारतीय रेलवे का वार्षिक पूंजीगत व्यय (Capex) 66,000 करोड़ रुपये से बढ़कर अब 2.72 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
विद्युतीकरण: लगभग 49,000 किलोमीटर रेलवे ट्रैक का विद्युतीकरण पूरा हो चुका है, जो जर्मनी के कुल रेलवे नेटवर्क के बराबर है।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC): 5 अप्रैल को माल ढुलाई के लिए समर्पित इस कॉरिडोर परियोजना के सफलतापूर्वक पूरा होने की घोषणा भी की गई।
आर्थिक प्रभाव:
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इन गलियारों से जुड़ने वाले शहर इंटीग्रेटेड इकोनॉमिक जोन के रूप में विकसित होंगे। साथ ही, उन्होंने स्वदेशी निर्माण पर जोर देते हुए विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने और बाहरी निर्भरता कम करने के प्रधानमंत्री मोदी के विजन का समर्थन किया।