पुणे न्यूज डेस्क: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर पुणे में बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। कार्यक्रम के मंच पर कांग्रेस के स्थानीय नेताओं को जगह नहीं मिलने के कारण राहुल गांधी के दौरे के राजनीतिक असर पर भी चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, इस दौरे से बीजेपी की अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और कांग्रेस की नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) दोनों छात्र संगठनों को नई ऊर्जा मिली है।
राहुल गांधी के कार्यक्रम से पहले शिवाजीनगर स्थित सीओईपी परिसर में एबीवीपी और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की हुई। एबीवीपी ने आरोप लगाया कि एनएसयूआई कार्यकर्ता छात्रों पर कार्यक्रम में शामिल होने के लिए दबाव बना रहे थे। वहीं, एनएसयूआई का दावा है कि एक छात्रा के समर्थन में पहुंचने पर उसके कार्यकर्ताओं के साथ एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने धक्का-मुक्की की। मामले में दोनों संगठनों के कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस ने मामले दर्ज किए हैं।
पुणे में पिछले कुछ वर्षों से एनएसयूआई की गतिविधियां काफी कमजोर मानी जा रही थीं और संगठन में पदाधिकारियों की नियुक्ति को लेकर भी कांग्रेस की ओर से ज्यादा सक्रियता नहीं दिख रही थी। दूसरी ओर, केंद्र में बीजेपी की सरकार आने के बाद एबीवीपी के आंदोलन भी पहले की तुलना में कम नजर आ रहे थे। लेकिन राहुल गांधी के पुणे दौरे की वजह से दोनों संगठनों को अपनी ताकत दिखाने का मौका मिला और छात्र राजनीति एक बार फिर चर्चा में आ गई।
‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी ने युवतियों से संवाद किया और देश की युवा महिलाओं की स्थिति और उनके सामने मौजूद चुनौतियों पर बात की। उन्होंने केंद्र की बीजेपी सरकार पर भी निशाना साधा। हालांकि, इस पूरे दौरे का सबसे बड़ा राजनीतिक असर यही माना जा रहा है कि एबीवीपी और एनएसयूआई दोनों को संगठनात्मक रूप से सक्रिय होने का मौका मिला है। पुणे में छात्र राजनीति के फिर से गर्माने के संकेत इस घटनाक्रम से साफ दिखाई दे रहे हैं।