पुणे न्यूज डेस्क: पुणे नगर निगम ने शहर के हर इलाके में नियमित, पर्याप्त और समान दबाव से पानी पहुंचाने के उद्देश्य से वर्ष 2018 में 'समान जलापूर्ति योजना' शुरू की थी। हालांकि, योजना शुरू होने के करीब आठ साल बाद भी इसे पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका है। इस बीच नागरिकों से हर साल 15 प्रतिशत बढ़ा हुआ जलकर वसूला जा रहा है, लेकिन समान जलापूर्ति का वादा अब तक पूरा नहीं हो पाया है।
योजना के तहत पुरानी और जर्जर पाइपलाइन बदलने, नई जलापूर्ति लाइनें बिछाने, हर घर में पानी का मीटर लगाने, पानी की बर्बादी रोकने और पूरे शहर में समान दबाव से पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था। दावा किया गया था कि भविष्य में 24 घंटे जलापूर्ति की व्यवस्था भी इसी योजना के जरिए संभव होगी। लेकिन विभिन्न कारणों से यह परियोजना लगातार विलंब का शिकार होती रही।
आज भी पुणे के कई इलाकों में लोगों को एक दिन छोड़कर पानी मिल रहा है। कई जगह कम दबाव के कारण ऊपरी मंजिलों तक पानी नहीं पहुंचता, जबकि दूषित पानी, पाइपलाइन लीकेज और टैंकरों पर निर्भरता जैसी समस्याएं भी बनी हुई हैं। ऐसे में योजना का मूल उद्देश्य अब भी अधूरा नजर आ रहा है।
नगर निगम इस योजना पर अब तक 1,600 करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर चुका है। इसके बावजूद परियोजना पूरी तरह शुरू नहीं हो सकी है। नागरिकों का सवाल है कि जब हर साल बढ़ा हुआ जलकर लिया जा रहा है, तो फिर उन्हें योजना का लाभ कब मिलेगा। साथ ही, परियोजना में देरी के लिए जिम्मेदार लोगों और बढ़े हुए जलकर के उपयोग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
हाल ही में पुणे दौरे पर आए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि योजना का करीब 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। उन्होंने नगर निगम अधिकारियों को अगले दो से तीन महीने के भीतर शेष कार्य पूरा कर योजना को पूरी तरह लागू करने के निर्देश दिए हैं।
नगर निगम के अनुसार, भूमिगत बिजली और गैस पाइपलाइन, दूरसंचार नेटवर्क, सड़क खुदाई का विरोध, कोरोना महामारी के दौरान काम में आई रुकावट और नगर सीमा में नए गांवों के शामिल होने के कारण परियोजना की गति प्रभावित हुई। इसी वजह से कई इलाकों में अब भी काम अधूरा है।