पुणे न्यूज डेस्क: महाराष्ट्र के पुणे शहर में वीजा नियमों के उल्लंघन के मामले में पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए तीन अमेरिकी नागरिकों को 'भारत छोड़ो नोटिस' (Leave India Notice) थमाया है। 53, 65 और 66 वर्ष की आयु के ये विदेशी नागरिक अप्रैल 2026 में टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे, लेकिन उन पर अपने वीजा उद्देश्यों के विपरीत जाकर धार्मिक गतिविधियों में संलिप्त होने का आरोप है। पुलिस जांच में पाया गया कि ये व्यक्ति शुक्रवार पेठ इलाके में ईसाई धर्म का प्रचार कर रहे थे और स्थानीय लोगों के बीच धार्मिक सामग्री का वितरण कर रहे थे, जो कि पर्यटन वीजा की शर्तों का सीधा उल्लंघन है।
इस मामले का खुलासा तब हुआ जब इन अमेरिकी नागरिकों ने एक निजी कैब चालक को अंग्रेजी, हिंदी और मराठी भाषाओं में छपे धार्मिक पर्चे देकर उसे प्रभावित करने का प्रयास किया। चालक की सतर्कता के कारण मामला तुरंत पुलिस तक पहुँचा, जिसके बाद पुणे पुलिस के विदेशी पंजीकरण कार्यालय (FRO) ने उनके दस्तावेजों और गतिविधियों की गहन जांच की। तलाशी के दौरान उनके पास से भारी मात्रा में आपत्तिजनक धार्मिक सामग्री बरामद हुई। इसके परिणामस्वरूप, अधिकारियों ने उन्हें 10 मई 2026 तक देश छोड़ने का अनिवार्य निर्देश जारी किया है।
दूसरी ओर, नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के कार्यालय से एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। यहाँ एक 20 वर्षीय हिंदू महिला कर्मचारी के जबरन धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए गए हैं। मामला तब प्रकाश में आया जब एक स्थानीय कार्यकर्ता ने पुलिस को सूचित किया कि उक्त कर्मचारी रमजान के दौरान उपवास (रोजा) रख रही थी। इस शिकायत के बाद जब जांच की परतें खुलीं, तो कार्यस्थल पर उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन के दबाव जैसे कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए, जिसने कॉर्पोरेट जगत में हलचल मचा दी है।
टाटा संस के अध्यक्ष एन. चंद्रशेखरन ने इन आरोपों की गंभीरता को स्वीकार करते हुए सोमवार को स्पष्ट किया कि इस पूरे घटनाक्रम की उच्च स्तरीय जांच की जा रही है। कंपनी के भीतर यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण जैसे आरोपों ने कार्यस्थल की सुरक्षा और नैतिकता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। नासिक पुलिस और टीसीएस प्रबंधन दोनों ही इस मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रहे हैं ताकि दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके और पीड़ित को न्याय मिल सके।