पुणे न्यूज डेस्क: पुणे में गणेशोत्सव और दूसरे सार्वजनिक कार्यक्रमों में डीजे और तेज आवाज वाले लाउडस्पीकर पर रोक लगाने की मांग करने वाले शनिवार पेठ के विद्यानंद बापट इन दिनों चर्चा में हैं। उन्होंने पुणे महानगरपालिका की महासभा में भी यह मुद्दा उठाया था। उनकी मांग को राज्यभर से कई लोगों का समर्थन मिला है, हालांकि कुछ लोगों ने इसका विरोध करते हुए उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल भी किया। अब विद्यानंद बापट ने ट्रोलिंग का जवाब देते हुए कहा है कि अगर प्रथा और परंपरा के नाम पर गलत प्रथाएं बढ़ रही हैं, तो उन्हें खत्म किया जाना चाहिए।
अपने विरोधियों को जवाब देते हुए बापट ने कहा कि पिछले सात-आठ दिनों में उन्हें बड़ी संख्या में फोन, मैसेज और लोगों के समर्थन मिले हैं। उनके मुताबिक, विरोध करने वालों के पास ठोस तर्क नहीं हैं और वे बार-बार प्रथा-परंपरा और रोजगार जैसे मुद्दों का हवाला दे रहे हैं। बापट का कहना है कि इन सभी तर्कों का वह पहले ही जवाब दे चुके हैं, इसलिए अब वही बातें दोहराई जा रही हैं।
गणेशोत्सव की पुरानी परंपरा का हवाला देने वालों पर बापट ने कहा कि सिर्फ किसी चीज के पुरानी होने से उसे सही नहीं माना जा सकता। उन्होंने सती प्रथा, बाल विवाह और विधवा केशवपन जैसी प्रथाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि समाज में कई पुरानी प्रथाएं समय के साथ खत्म की गई हैं, क्योंकि वे लोगों के अधिकारों के खिलाफ थीं। उनके मुताबिक, इसी तरह किसी परंपरा के नाम पर गलत चीज को जारी रखना उचित नहीं है।
बापट ने कहा कि गणेशोत्सव मनाना लोगों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा हो सकता है, लेकिन इसके नाम पर सार्वजनिक जगहों पर तेज लाउडस्पीकर और डीजे बजाना, सड़कों पर मंडप लगाकर रास्ते रोकना या यातायात बाधित करने वाली मिरवणुक निकालना सही नहीं है। उन्होंने ऐसी प्रथाओं को कुप्रथा बताते हुए कहा कि सिर्फ परंपरा का नाम देकर उनका समर्थन नहीं किया जा सकता और जरूरत पड़ने पर इन्हें खत्म किया जाना चाहिए।