पुणे न्यूज डेस्क: पुणे के मुंधवा इलाके में 40 एकड़ सरकारी जमीन के हस्तांतरण मामले में पंजीकरण महानिरीक्षक (IGR) रवींद्र बिनवडे ने बड़ा फैसला सुनाया है। प्रशासन ने अमेडिया एंटरप्राइजेज (Amedia Enterprises) की अपील को खारिज करते हुए कंपनी पर भारी जुर्माना और स्टाम्प ड्यूटी भरने का आदेश जारी किया है।
मामले के मुख्य बिंदु:
बड़ी वसूली का आदेश: कंपनी को अब कुल 22.47 करोड़ रुपये चुकाने होंगे। इसमें 21 करोड़ रुपये की स्टाम्प ड्यूटी और 1.47 करोड़ रुपये का जुर्माना शामिल है।
अमान्य छूट का दावा: कंपनी ने महाराष्ट्र आईटी-आईटीईएस नीति 2023 और उद्योग विभाग के 'इरादा पत्र' (LOI) का हवाला देकर स्टाम्प ड्यूटी में पूरी छूट मांगी थी। कंपनी ने 300 करोड़ रुपये के इस बड़े सौदे को महज 500 रुपये की स्टाम्प ड्यूटी पर दर्ज कराया था, जिसे प्रशासन ने अब अमान्य करार दिया है।
जमीन और कंपनी का संबंध: यह विवाद मुंधवा में 'बोटैनिकल सर्वे ऑफ इंडिया' की करीब 300 करोड़ रुपये मूल्य की 'महार वतन' जमीन से जुड़ा है। इस जमीन पर डेटा सेंटर बनाने का प्रस्ताव था। रिपोर्टों के अनुसार, उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के बेटे पार्थ पवार इस कंपनी के निदेशक और 99% शेयर होल्डर हैं।
अगला कदम:
IGR के इस आदेश के बाद कंपनी के पास कानूनी विकल्प खुले हैं। अमेडिया एंटरप्राइजेज इस फैसले के खिलाफ अगले 60 दिनों के भीतर राज्य के राजस्व मंत्री के समक्ष अपील दायर कर सकती है।
यह मामला तब सुर्खियों में आया था जब आरोप लगे थे कि पावर ऑफ अटॉर्नी धारक शीतल तेजवानी ने नियमों को ताक पर रखकर यह जमीन कंपनी को हस्तांतरित की और करोड़ों रुपये के स्टाम्प शुल्क की चोरी की गई।