पुणे न्यूज डेस्क: महाराष्ट्र के पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ शहरों में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और प्रशासनिक खर्चों को नियंत्रित करने के लिए दो बड़े फैसले लिए गए हैं। सोशल मीडिया पर पुणे में 'कर्फ्यू' या 'लॉकडाउन' लगने की अफवाहों के बीच पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार ने साफ किया है कि यह कोई लॉकडाउन नहीं है। यह कानून-व्यवस्था और आगामी त्योहारों के मद्देनजर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हर 15 दिन में जारी होने वाला एक नियमित एहतियाती आदेश (जमावबंदी) है। इसके साथ ही, पुणे नगर निगम (PMC) ने ईंधन की बढ़ती कीमतों को देखते हुए कड़े वित्तीय कटौती के निर्देश जारी किए हैं।
पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में निषेधाज्ञा और पाबंदियां
पुणे में 26 मई की रात से और पिंपरी-चिंचवड़ में 27 मई की आधी रात से अगले 14 दिनों (9 जून तक) के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए गए हैं।
इन गतिविधियों पर रहेगी पूरी रोक:
सार्वजनिक आयोजन: पुलिस की अनुमति के बिना 5 या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने, सार्वजनिक सभाएं करने, विरोध प्रदर्शन, मार्च या जुलूस निकालने पर रोक है।
हथियार और विस्फोटक: लाठी, डंडे, तलवार, भाले, आग्नेयास्त्र, धारदार वस्तुएं, पत्थर या कोई भी ज्वलनशील व विस्फोटक सामग्री साथ लेकर चलने या जमा करने पर पाबंदी है।
भड़काऊ गतिविधियां: किसी भी नेता या व्यक्ति के प्रतीकात्मक पुतले/तस्वीरें जलाने, भड़काऊ नारे लगाने, आपत्तिजनक गाने या संगीत बजाने और समाज की शांति भंग करने वाले भाषणों व तख्तियों के प्रदर्शन पर रोक रहेगी।
रात 10 बजे के बाद खाने-पीने की दुकानों पर शिकंजा
पुलिस प्रशासन ने देर रात तक चलने वाले अवैध व्यापार और उसके कारण जुटने वाली असामाजिक तत्वों की भीड़ को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए हैं:
10 बजे की समय सीमा: एफसी रोड, जेएम रोड, कोथरूड, बाणेर, कात्रज और फुरसुंगी जैसे प्रमुख इलाकों में सड़क किनारे चलने वाले स्टॉल, फूड वेंडर और पान की गुमटियों को रात 10 बजे तक बंद करने का आदेश दिया गया है।
लाइसेंसी प्रतिष्ठानों को छूट: जो रेस्टोरेंट और बार लाइसेंस शुदा हैं, वे अपने लाइसेंस में तय समय सीमा के अनुसार ही संचालित हो सकेंगे। फुटपाथों पर अवैध कब्जा करने वाले भोजनालयों पर भी कार्रवाई तेज कर दी गई है।
PMC का ईंधन बचत और खर्च कटौती अभियान
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया संकट के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर पुणे नगर निगम ने अपने सभी विभागों के लिए सरकारी वाहनों के इस्तेमाल को लेकर सख्त नियमावली जारी की है।
अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए नए निर्देश:
सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता: सभी कर्मचारियों से दफ्तर आने-जाने और फील्ड विजिट के लिए हफ्ते में कम से कम एक बार मेट्रो, लोकल ट्रेन या सार्वजनिक बसों का इस्तेमाल करने को कहा गया है।
कारपूलिंग और ऑनलाइन बैठकें: एक ही गंतव्य पर जाने के लिए अलग-अलग गाड़ियों के बजाय 'कारपूलिंग' की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। इसके अलावा, अधिकांश सेमिनार, बैठकें और ट्रेनिंग सत्र अब ऑनलाइन (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) आयोजित करने के निर्देश हैं।
सख्त वाहन नियंत्रण: विभाग प्रमुखों को वाहनों के उपयोग, उनके रखरखाव और ईंधन खर्च की बारीकी से निगरानी करने को कहा गया है ताकि नगर निगम के खजाने पर बढ़ रहे वित्तीय बोझ को कम किया जा सके।