पुणे न्यूज डेस्क: पुणे पदवीधर मतदारसंघ की चुनावी तैयारी ने कोल्हापुर की राजनीति में एक पुराने रिश्ते को प्रभावित कर दिया है। कागल के प्रताप उर्फ भय्या माने पिछले काफी समय से इस सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं और अब उन्होंने पीछे हटने से इनकार कर दिया है। इसी मुद्दे पर उनका अपने नेता और महाराष्ट्र के मेडिकल एजुकेशन मंत्री हसन मुश्रीफ से राजनीतिक मतभेद खुलकर सामने आ गया है। हालिया रिपोर्टों में भी राष्ट्रवादी कांग्रेस की ओर से भय्या माने की उम्मीदवारी और बीजेपी की ओर से शरद लाड की दावेदारी का जिक्र है।
हसन मुश्रीफ ने कहा कि भय्या माने लंबे समय तक उनके साथ मजबूती से काम करते रहे और उनके गुट में अहम भूमिका निभाते थे। मुश्रीफ के मुताबिक, उन्होंने माने को चुनाव नहीं लड़ने की सलाह दी थी और आगे राज्यपाल नियुक्त विधायक या किसी महामंडल में मौका देने की बात भी समझाने की कोशिश की, लेकिन माने अपने फैसले पर कायम रहे। मुश्रीफ ने कहा कि अब दोनों के बीच राजनीतिक साथ नहीं रहा है। यह रिश्ता करीब 25 साल पुराना बताया जा रहा है।
दूसरी ओर, भय्या माने के समर्थक लगातार चाहते थे कि वह पुणे पदवीधर चुनाव मैदान में उतरें। महायुति में इस सीट को लेकर बीजेपी और राष्ट्रवादी कांग्रेस के बीच दावेदारी का मुद्दा बना हुआ है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने भी कहा है कि पुणे पदवीधर और शिक्षक सीट पर महायुति की ओर से कौन चुनाव लड़ेगा, इसका अंतिम फैसला मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्री मिलकर करेंगे।
अब भय्या माने ने चुनाव लड़ने का फैसला कायम रखते हुए अपनी राजनीतिक तैयारी तेज कर दी है। वहीं बीजेपी की ओर से शरद लाड भी इस सीट के लिए दावेदार हैं। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक पुणे पदवीधर समेत महाराष्ट्र की तीन पदवीधर और दो शिक्षक सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान होगा और 27 अक्टूबर को मतगणना होगी। ऐसे में भय्या माने और हसन मुश्रीफ के बीच सामने आया यह राजनीतिक मतभेद कोल्हापुर की राजनीति में भी चर्चा का विषय बना हुआ है।