पुणे न्यूज डेस्क: पुणे में सोमवार शाम करीब छह बजे शहर के कई इलाकों में गरज के साथ बारिश हुई। हडपसर, येरवडा और रेलवे स्टेशन के आसपास तेज बारिश हुई, जबकि कात्रज और आंबेगांव में मध्यम बारिश दर्ज की गई। शहर के कुछ हिस्सों में हल्की बौछारें भी पड़ीं। बारिश से गर्मी से तप रहे लोगों को थोड़ी देर के लिए राहत मिली, लेकिन बारिश रुकते ही उमस फिर बढ़ गई। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, अगले दो दिनों तक तापमान में खास बदलाव की संभावना नहीं है। दोपहर के बाद आसमान में बादल छाए रह सकते हैं।
पिछले 15 दिनों में पुणे का तापमान बढ़ा है और दोपहर में सड़कों पर निकलने वालों को तेज धूप का सामना करना पड़ रहा है। बढ़ती गर्मी और उमस के बीच लोग अक्टूबर की गर्मी से राहत पाने के लिए बारिश का इंतजार कर रहे थे। सोमवार को हडपसर, विमाननगर, वानवडी और पिंपरी-चिंचवड़ में अच्छी बारिश हुई। वहीं, शहर के मध्य हिस्सों, शिवाजीनगर और औंध में हल्की बौछारें पड़ीं। अचानक बारिश होने से लोगों को परेशानी भी हुई। रात साढ़े आठ बजे तक मगरपट्टा में 14 मिलीमीटर, लोहगांव में 7.2 मिलीमीटर और वारजे में 6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। जिले के कुछ हिस्सों में भी शाम के बाद हल्की बारिश हुई।
मुंबई में पानी की चिंता बढ़ी
एक तरफ पुणे में लोग बारिश से गर्मी से राहत पाने का इंतजार कर रहे हैं, वहीं मुंबई में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ रही है। अल नीनो का असर, कम बारिश, बढ़ती गर्मी के कारण पानी की मांग में इजाफा और वाष्पीकरण की वजह से मुंबई को पानी देने वाले सातों बांधों में जलस्तर घटा है। फिलहाल इनमें कुल क्षमता का करीब 90 फीसदी पानी बचा है। खास तौर पर मोडक सागर बांध का जलस्तर पिछले दो हफ्तों में 18 फीसदी गिरकर 52 फीसदी रह गया है। तानसा बांध में भी पानी का स्तर 90 फीसदी से नीचे आने से चिंता बढ़ गई है।
मुंबई को अपर वैतरणा, मोडक सागर, तानसा, मध्य वैतरणा, भातसा, विहार और तुलसी बांधों से पानी मिलता है। इन सातों बांधों की कुल क्षमता 14,47,377 लाख लीटर नहीं, बल्कि 14,47,377 दशलक्ष लीटर यानी करीब 1,44,737.7 करोड़ लीटर है। इनसे मुंबई को रोजाना करीब 4,100 दशलक्ष लीटर पानी की आपूर्ति की जाती है। मोडक सागर बांध से पानी का इस्तेमाल ज्यादा होने के कारण इसका जलस्तर तेजी से गिरा है। अक्टूबर के पहले हफ्ते में यहां करीब 70 फीसदी पानी था, जो 19 अक्टूबर तक घटकर 52 फीसदी रह गया। पिछले साल इसी तारीख को जलस्तर 83 फीसदी और 2024 में 87 फीसदी था।
तानसा बांध में फिलहाल करीब 87 फीसदी पानी बचा है। इसके मुकाबले 2025 में इसी तारीख को जलस्तर 95 फीसदी और 2024 में 97 फीसदी था। मुंबई को पानी देने वाले सातों बांधों में अभी कुल 13,03,418 दशलक्ष लीटर पानी बचा है, जो कुल क्षमता का करीब 90 फीसदी है। पिछले दो वर्षों में इसी समय यह स्तर 2024 में 97 फीसदी और 2025 में 96 फीसदी था। पानी की चोरी और लीकेज के कारण मुंबई के लोगों तक जरूरत से करीब 34 फीसदी कम पानी पहुंचने की बात भी सामने आई है। इसे देखते हुए मुंबई महानगरपालिका ने पानी की चोरी रोकने और लीकेज पर नियंत्रण के लिए अभियान तेज किया है। स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने कहा कि पानी बचाने के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं और उसी के तहत कार्रवाई की जा रही है।