पुणे न्यूज डेस्क: पुणे में गणेशोत्सव के दौरान ध्वनि प्रदूषण को लेकर बीजेपी सांसद मुरलीधर मोहोल ने शुक्रवार को साफ कहा कि लोगों को कानून और अदालत के तय नियमों के मुताबिक ही उत्सव मनाना होगा। उन्होंने कहा कि डीजे, प्रेशर मिड, प्लाज्मा और लेजर के इस्तेमाल पर रोक होनी चाहिए, जबकि पारंपरिक ढोल-ताशा बजाने का विरोध नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि त्योहार ऐसा हो, जिससे किसी दूसरे व्यक्ति को परेशानी न हो।
मुरलीधर मोहोल ने कहा कि पुणे का गणेशोत्सव 130 साल से ज्यादा पुरानी परंपरा है और इसमें लोगों की भागीदारी बढ़नी चाहिए। हालांकि, उत्सव के नाम पर तय डेसिबल लिमिट का उल्लंघन नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि प्लाज्मा, प्रेशर मिड और लेजर पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए और ध्वनि की सीमा कानून के मुताबिक ही रखी जानी चाहिए।
गणेशोत्सव में तेज आवाज में डीजे बजाने को लेकर पुणे के लोग और कई सामाजिक संगठन पहले भी आपत्ति जता चुके हैं। उनका कहना है कि तेज आवाज से लोगों को परेशानी होती है और ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है। हाल की बैठक में पुणे नगर निगम के अधिकारियों ने भी ध्वनि प्रदूषण से जुड़ी समस्याएं सामने रखी थीं, जबकि कुछ गणेश मंडलों ने डीजे की अनुमति देने की मांग की थी।
मोहोल ने कहा कि अगर गणेशोत्सव के दौरान ध्वनि नियमों का पालन कराया जाता है तो सालभर होने वाले दूसरे त्योहारों और कार्यक्रमों में भी इन्हीं नियमों को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बीजेपी के पार्षदों ने डीजे की अनुमति देने की मांग नहीं की है। मोहोल के मुताबिक, उनका अपना गणेश मंडल भी स्पीकर के इस्तेमाल से बचता है।