पुणे न्यूज डेस्क: महाराष्ट्र के पुणे जिले से दिल दहला देने वाले 'लोनावला किला हत्याकांड' (पुणे फोर्ट मर्डर केस) में जांच कर रही पुलिस और साइबर एक्सपर्ट्स की टीम के हाथ कई बड़े और चौंकाने वाले डिजिटल सबूत लगे हैं। पुलिस के दावों के अनुसार, 20 वर्षीय मुख्य आरोपी सिया गोयल ने अपने मंगेतर केतन अग्रवाल (25) को खाई में धकेलने से ठीक 34 मिनट पहले अपने कथित प्रेमी और सह-आरोपी चेतन चौधरी से फोन पर बात की थी। तकनीकी सर्विलांस टीम को मिले कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) और मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच से यह साफ हुआ है कि इस "सीक्रेट कॉल" के जरिए ही हत्या की अंतिम साजिश और रणनीति को अंतिम रूप (फाइनल कन्फर्मेशन) दिया गया था।
पुणे ग्रामीण पुलिस के जांचकर्ताओं का मानना है कि इस अंतिम फोन कॉल के दौरान सिया गोयल ने लोहगढ़ किले (Lohagad Fort) के एक सुनसान व्यूप्वाइंट से चेतन चौधरी को अपनी सटीक लोकेशन साझा की थी। उसने फोन पर यह भी पक्का किया था कि उस वक्त आसपास कोई अन्य पर्यटक मौजूद नहीं है ताकि योजना के मुताबिक वारदात को अंजाम दिया जा सके। पुलिस के हाथ यह डिजिटल सबूत उस वक्त लगा जब दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन को फोरेंसिक लैब भेजा गया था। इसके अलावा, पुलिस ने खुलासा किया है कि दोनों आरोपियों ने साजिश के सबूत मिटाने के लिए पिछले तीन महीनों के दौरान आपस में किए गए व्हाट्सएप चैट्स, इंस्टाग्राम मैसेज और वॉयस नोट्स को पूरी तरह डिलीट कर दिया था, जिसे रिकवर करने के लिए साइबर विशेषज्ञ जुटे हुए हैं।
जांच टीम अब रिकवर किए जा रहे संदेशों का मिलान आरोपियों के लोकेशन रिकॉर्ड, इंटरनेट आईपी लॉग्स (IP logs) और कॉल विवरण से कर रही है ताकि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 (हत्या) के तहत एक सुनियोजित और पूर्व-नियोजित हत्या का पुख्ता मामला अदालत के सामने पेश किया जा सके। जांच के मुताबिक, सिया गोयल की शादी आगामी नवंबर के महीने में केतन अग्रवाल से होने वाली थी, लेकिन वह इस शादी के लिए तैयार नहीं थी। इसी वजह से उसने 18 जून को केतन को लोहगढ़ किले के एक गहरे ढलान (क्लिफ) से नीचे धकेल दिया। पूछताछ के दौरान सिया के भाई ने पुलिस को बताया कि सिया और चेतन की पहली मुलाकात एक क्रिकेट मैच के दौरान हुई थी और बाद में एक कॉमन फ्रेंड के जरिए दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ी थीं।
पुलिस के अनुसार, इस खौफनाक हत्याकांड की अंतिम रूपरेखा मई के अंत में ही तैयार कर ली गई थी। सूत्रों के हवाले से यह भी पता चला है कि सिया ने इससे पहले 14 जून को भी केतन को किले से नीचे गिराने की कोशिश की थी, लेकिन तब केतन ने सूझबूझ दिखाते हुए एक झाड़ी को पकड़ लिया और उसकी जान बच गई थी। उस समय सिया ने यह बहाना बनाया था कि एक सांप को देखकर वह अचानक डर गई थी और गलती से उसका हाथ केतन को लग गया। पहली कोशिश नाकाम होने के बाद, आरोपियों ने दोबारा 18 जून को किले पर जाने की योजना बनाई और इस बार सह-आरोपी चेतन चौधरी भी गुपचुप तरीके से उनके पीछे-पीछे गया था, ताकि केतन किसी भी सूरत में बच न सके। फिलहाल दोनों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं और मामले की गहन जांच जारी है।