पुणे न्यूज डेस्क: पुणे नगर निगम (पीएमसी) ने हफ्ते में एक दिन पानी की सप्लाई बंद करने का फैसला लागू करने के दो हफ्ते बाद अब पानी बचाने के लिए अगला कदम उठाने की तैयारी कर ली है। इसके तहत शहर में अचानक जांच की जाएगी और पीने के पानी का इस्तेमाल गैर-जरूरी कामों के लिए करने वालों पर जुर्माना लगाया जा सकता है। इसमें गाड़ियां धोना, स्विमिंग पूल में पानी भरना और बागवानी जैसे काम शामिल हैं। शहर में पानी का भंडार लगातार कम हो रहा है। ऐसे में मौजूदा 10 प्रतिशत पानी कटौती को बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने की मांग भी उठ रही है। एक अधिकारी ने बताया कि हर गुरुवार पानी की कटौती 15 अक्टूबर से शुरू हुई थी। उसी दिन पानी के सही इस्तेमाल को लेकर एडवाइजरी भी जारी की गई थी। लोगों को जागरूक होने के लिए दो हफ्ते का समय दिया गया था, जिसके बाद अब नियमित जांच शुरू की जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का मकसद लोगों को परेशान करना या उन पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि पानी की बर्बादी रोकना है। अधिकारी ने कहा कि अगले मॉनसून में अभी करीब 10 महीने का समय है, इसलिए पानी का समझदारी से इस्तेमाल करना जरूरी है, ताकि आगे किसी बड़े संकट का सामना न करना पड़े। पीएमसी सोशल मीडिया के जरिए भी लोगों को पानी बचाने के लिए जागरूक कर रहा है। साथ ही, स्विमिंग पूल चलाने वालों को पीने के पानी के बजाय ट्रीट किए गए पानी का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं। गाड़ी धोने वाले सेंटरों से भी पीने के पानी का इस्तेमाल नहीं करने की उम्मीद की जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि पानी की बर्बादी रोकने में नागरिकों की भूमिका भी अहम है।
अब हाउसिंग सोसायटियों में भी जांच की जा सकती है। नगर निगम की टीमें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की जांच करेंगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ट्रीट किए गए पानी को बागवानी और दूसरे गैर-पीने वाले कामों में दोबारा इस्तेमाल किया जा रहा है या नहीं। जिन सोसायटियों के एसटीपी बंद पड़े हैं, उन्हें नोटिस दिया जाएगा। सोसायटियों को अपने परिसर में पानी की पाइपलाइन से होने वाले लीकेज को भी ठीक करना होगा और पानी की बर्बादी रोकनी होगी। वहीं, पीएमसी के गार्डन विभाग ने भी सभी जोनल ऑफिसों को बागवानी और सफाई के लिए सिर्फ ट्रीट किए गए पानी का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया है। इस नियम को तुरंत लागू करने की तैयारी है।
पानी की कमी की चिंता इसलिए बढ़ गई है, क्योंकि शहर को पानी देने वाले चार बांधों में फिलहाल 24 टीएमसी पानी बचा है, जबकि पिछले साल इसी समय यह मात्रा 28.5 टीएमसी थी। सिंचाई विभाग के मुताबिक, शहर और ग्रामीण इलाकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए लगातार पानी छोड़े जाने से यह अंतर बढ़ा है। ऐसे में अगले मॉनसून तक पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बनी हुई है। नागरिकों ने भी पीएमसी से पानी की बर्बादी रोकने के लिए और सख्त कदम उठाने की मांग की है। सातारा रोड के रहने वाले संदीप जोशी ने कहा कि पीने के पानी के इस्तेमाल पर निगरानी बढ़ाना अच्छी बात है, लेकिन नगर निगम को पानी की सप्लाई वाली पाइपलाइनों के लीकेज ठीक करने के अपने वादे पर भी काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कम से कम एक वॉटर जोन को पूरी तरह लीकेज-मुक्त बनाया जाना चाहिए। वहीं, विश्रांतवाड़ी के रहने वाले अजय मुजुमदार ने टैंकरों की सप्लाई पर सख्त निगरानी रखने की मांग की। उनका कहना है कि खासकर पीएमसी के वॉटर पॉइंट से पानी भरने वाले टैंकरों पर नजर रखी जानी चाहिए और निर्माण स्थलों पर टैंकर के पानी के इस्तेमाल को रोकना चाहिए।