पुणे न्यूज डेस्क: पुणे आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने फाइजर हेल्थकेयर इंडिया के एक पूर्व कर्मचारी के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि कंपनी की वॉलंटरी रिटायरमेंट स्कीम (VRS) के तहत मिले 65.21 लाख रुपये टैक्स के दायरे में नहीं आएंगे। 8 जून 2026 को दिए फैसले में ITAT ने इस रकम को कैपिटल रिसीट माना और इसे टैक्स योग्य आय मानने से इनकार कर दिया।
दरअसल, फाइजर ने औरंगाबाद प्लांट बंद करने का फैसला लिया था और कर्मचारियों के लिए 2019 में एक विशेष VRS स्कीम शुरू की थी। इसी स्कीम के तहत कर्मचारी प्रकाश सुखदेव सोनावणे ने स्वैच्छिक रिटायरमेंट लिया और वित्त वर्ष 2018-19 में उन्हें कुल 65,21,105 रुपये मिले। इसमें करीब 50.70 लाख रुपये एक्स-ग्रेशिया/सेवरेंस पे, 12 लाख रुपये अर्ली-बिड और ग्रुप पार्टिसिपेशन इंसेंटिव और करीब 2.50 लाख रुपये तीन महीने की नोटिस अवधि के भुगतान के थे।
मामला तब शुरू हुआ जब इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करते समय सोनावणे ने इस रकम को कैपिटल रिसीट के तौर पर क्लेम नहीं किया था। उन्होंने इसे एडवांस सैलरी मानते हुए सेक्शन 89 के तहत करीब 21.77 लाख रुपये की राहत मांगी थी। बाद में उन्होंने अपना पक्ष बदलते हुए कहा कि VRS के तहत मिली पूरी रकम कैपिटल रिसीट है और इस पर टैक्स नहीं लगना चाहिए। हालांकि, CIT(A)/NFAC ने इसे खारिज करते हुए सेक्शन 56(2)(xi) के तहत टैक्स योग्य आय माना था।
पुणे ITAT ने मामले में पाया कि फाइजर ने सोनावणे की नौकरी खत्म नहीं की थी, बल्कि उन्होंने खुद VRS के तहत इस्तीफा दिया था। स्कीम की शर्तों में भी साफ था कि कर्मचारियों का नौकरी छोड़ना स्वैच्छिक इस्तीफा माना जाएगा, न कि कंपनी की ओर से टर्मिनेशन या रिट्रेंचमेंट। ITAT ने फाइजर के इसी स्कीम से जुड़े पुराने मामलों का भी हवाला दिया, जिनमें भुगतान को कैपिटल रिसीट माना गया था। इसके बाद ट्रिब्यूनल ने निचले अधिकारियों का आदेश रद्द कर दिया और 65.21 लाख रुपये को टैक्स से बाहर रखते हुए असेसमेंट में बदलाव करने का निर्देश दिया।