पुणे न्यूज डेस्क: बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को तर्कवादी नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के मामले में दोषी शरद कलास्कर को ज़मानत दे दी है। अदालत ने यह फैसला कलास्कर द्वारा अपनी उम्रकैद की सजा के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए सुनाया। जस्टिस ए.एस. गडकरी और जस्टिस आर.आर. भोंसले की पीठ ने माना कि मामले की अंतिम सुनवाई में काफी समय लग सकता है, इसलिए अपील लंबित रहने तक आरोपी को जेल में रखना उचित नहीं है।
अदालत ने ज़मानत देते समय गवाहों और सबूतों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूत संदिग्ध हैं और दो चश्मदीद गवाहों के बयानों में भी विरोधाभास नजर आता है। हाई कोर्ट के अनुसार, ट्रायल कोर्ट के फैसले में पहचान की प्रक्रिया को लेकर जो आधार बनाए गए थे, वे पुख्ता नहीं लगे। इसी वजह से 50,000 रुपये के मुचलके पर कलास्कर की रिहाई का रास्ता साफ हो गया।
हालांकि, अभियोजन पक्ष और सीबीआई ने इस ज़मानत का कड़ा विरोध किया था। उनका तर्क था कि गवाहों ने कलास्कर को खुद गोली चलाते देखा था, लेकिन कोर्ट ने उनके इस अनुरोध को खारिज कर दिया कि ज़मानत आदेश पर रोक लगाई जाए। वहीं, नरेंद्र दाभोलकर के बेटे हामिद दाभोलकर ने इस फैसले पर निराशा जताते हुए कहा है कि वे हाई कोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।
नरेंद्र दाभोलकर की हत्या अगस्त 2013 में पुणे में हुई थी, जब वे सुबह की सैर पर निकले थे। इस मामले में 2024 में विशेष अदालत ने शरद कलास्कर और सचिन अंदुरे को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। कलास्कर पर कम्युनिस्ट नेता गोविंद पानसरे की हत्या का भी आरोप है, हालांकि उस मामले में उसे पहले ही ज़मानत मिल चुकी है। अब औपचारिक कार्रवाई पूरी होने के बाद वह जेल से बाहर आ सकेगा।