पुणे न्यूज डेस्क: मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर 6,695 करोड़ रुपये की लागत से बने 'मिसिंग लिंक' प्रोजेक्ट को शुरू हुए अभी नौ सप्ताह ही हुए थे कि मानसून की पहली बड़ी परीक्षा में इसे झटका लगा है। भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन (लैंडस्लाइड) से इस कॉरिडोर का एक हिस्सा प्रभावित हो गया, जिसके चलते यातायात को अस्थायी रूप से पुराने मुंबई-पुणे हाईवे की ओर मोड़ना पड़ा।
इस घटना ने महाराष्ट्र की सबसे महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में से एक की तैयारियों और ढांचागत मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस कॉरिडोर को दुर्घटनाओं के लिए बदनाम खंडाला घाट मार्ग का सुरक्षित, तेज और स्थायी विकल्प बताया गया था।
क्या है 'मिसिंग लिंक' प्रोजेक्ट?
'मिसिंग लिंक' मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे का 13.3 किलोमीटर लंबा हिस्सा है, जिसे खोपोली और सिंहगढ़ इंस्टीट्यूट के बीच स्थित 19.8 किलोमीटर लंबे खंडाला घाट सेक्शन को बायपास करने के लिए बनाया गया है।
पहले एक्सप्रेसवे का पूरा ट्रैफिक इसी छह लेन वाले घाट मार्ग से गुजरता था, जहां तीखी चढ़ाई, हेयरपिन मोड़ और खतरनाक घुमावों के कारण अक्सर लंबा जाम और सड़क हादसे होते थे। इन्हीं समस्याओं को दूर करने के लिए 'मिसिंग लिंक' परियोजना तैयार की गई थी, जिससे यात्रा का समय कम होने के साथ-साथ सफर को अधिक सुरक्षित बनाने का लक्ष्य रखा गया था।