पुणे न्यूज डेस्क: महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग यानी एमपीएससी की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर पुणे में अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन जारी है। 2 अक्टूबर से चल रहे इस प्रदर्शन में हजारों अभ्यर्थी पारदर्शिता, भर्ती परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई और जिन परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं, उन्हें रद्द करने की मांग कर रहे हैं। विवाद के बीच कई अहम परीक्षाएं टल चुकी हैं और नई तारीखों को लेकर भी अभ्यर्थियों में असमंजस बना हुआ है।
मामले की शुरुआत ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा को लेकर उठे सवालों से हुई। 12 जून को जारी रिजल्ट में 506 उम्मीदवार इंटरव्यू के लिए चुने गए थे, लेकिन बाद में परीक्षा का पेपर लीक होने के आरोप लगे। अगस्त में एमपीएससी ने भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी मानते हुए इसे रद्द कर दिया। तब तक 488 उम्मीदवारों के इंटरव्यू हो चुके थे और प्रोविजनल मेरिट लिस्ट भी जारी हो चुकी थी। इसके बाद 2025 की स्टेट सर्विसेज मेन्स परीक्षा की कॉपी जांच को लेकर भी अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए और अंकों में असामान्य अंतर होने का दावा किया।
सितंबर में एमपीएससी के तत्कालीन सचिव महेंद्र हरपलकर के चेहरे पर स्याही लगाने की घटना के बाद विवाद और बढ़ गया। इसके कुछ समय बाद स्टेट सर्विसेज मेन्स 2026, महाराष्ट्र सिविल इंजीनियरिंग मेन्स 2026 और महाराष्ट्र ग्रुप-बी मेन्स परीक्षा को टाल दिया गया। सरकार ने बाद में एमपीएससी के कामकाज की व्यापक समीक्षा के लिए सात सदस्यीय समिति बनाने की बात कही और महेंद्र हरपलकर का तबादला भी किया गया। सरकार ने अब आयोग के मौजूदा और पूर्व अध्यक्षों व सदस्यों के कामकाज की जांच के लिए रिटायर्ड हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में समिति बनाने की सिफारिश राज्यपाल को भेजी है।
अभ्यर्थियों की मांगों को लेकर अब प्रदर्शन अलग-अलग समूहों में भी बंट गया है। एक समूह एमपीएससी चेयरमैन विवेक भीमनवार के इस्तीफे की मांग कर रहा है, जबकि दूसरे अभ्यर्थी परीक्षा के डिस्क्रिप्टिव पैटर्न और पुराने ऑब्जेक्टिव पैटर्न को लेकर अलग-अलग राय रखते हैं। इस बीच बॉम्बे हाईकोर्ट ने सरकार की जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि भर्ती परीक्षाएं निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराना जरूरी है और सरकार से इस दिशा में रोडमैप मांगा है। कई परीक्षाओं की नई तारीखें अभी घोषित नहीं होने से हजारों अभ्यर्थियों की तैयारी और भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।