पुणे न्यूज डेस्क: महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ पुणे के एसएम जोशी ब्रिज पर पिछले 11 दिनों से चल रहा अभ्यर्थियों का प्रदर्शन खत्म करने पर सहमति बन गई है। राज्य सरकार ने उनकी ज्यादातर मांगों पर विचार करने का भरोसा दिया है। साथ ही, जांच समिति की रिपोर्ट आने तक एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमनवार को अनिवार्य छुट्टी पर भेजने पर भी सहमति बनी है। अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में परीक्षा में हुई गड़बड़ियों की समयसीमा के भीतर जांच, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज केस वापस लेना और 3 जनवरी 2027 को होने वाली ग्रुप सी परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ाना शामिल है।
सरकार की ओर से यह घोषणा होने के बाद भीमनवार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि राज्य सरकार ने एमपीएससी पेपर लीक मामले की न्यायिक जांच कराने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा नैतिकता को प्राथमिकता दी है, इसलिए जांच पूरी होने तक पद पर बने रहने के बजाय छुट्टी पर जाने का फैसला किया है। भीमनवार ने यह भी कहा कि एमपीएससी की स्वायत्तता, विश्वसनीयता और छात्रों के हित हमेशा उनकी प्राथमिकता रहे हैं। रविवार देर रात मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले के नेतृत्व में सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर पहुंचे इस प्रतिनिधिमंडल ने 20 मांगों को लेकर सुधारों का मसौदा पेश किया। प्रदर्शनकारियों की ओर से बातचीत का नेतृत्व कर रहे एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने वहां मौजूद अभ्यर्थियों को मसौदे की जानकारी दी।
रोहित पवार ने कहा कि सरकार ने अध्यक्ष के इस्तीफे को छोड़कर दूसरी मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया है। उन्होंने माना कि प्रदर्शनकारी शुरुआत में भीमनवार के इस्तीफे की मांग पर अड़े थे, लेकिन आंदोलन को अनिश्चित समय तक जारी रखना भी संभव नहीं था। पवार ने इस समझौते को सभी पक्षों के लिए फायदेमंद बताया। सरकार ने पांच सदस्यीय जांच समिति बनाने का प्रस्ताव दिया है, जिसकी अध्यक्षता बॉम्बे हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश दिलीप भोसले करेंगे। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे समिति के सचिव होंगे। समिति को पहले 90 दिन में जांच पूरी करनी थी, लेकिन अब यह समय घटाकर 60 दिन करने का प्रस्ताव है। जांच में पेपर लीक और फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए), ग्रुप बी सेवाओं, विभागीय पुलिस सब-इंस्पेक्टर (पीएसआई) भर्ती, कृषि और आबकारी विभागों की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की पड़ताल की जाएगी।
अभ्यर्थियों ने एमपीएससी सदस्य अभय वाघ की भूमिका की जांच की मांग भी रखी है। जनवरी 2026 में एफडीए परीक्षा का पेपर लीक होने के समय वाघ के पास अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार था। रोहित पवार ने कहा कि मुंढे को बिना किसी दखल के स्वतंत्र जांच करने का मौका मिलना चाहिए। मसौदे में आंदोलन के आयोजकों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले वापस लेने और प्रदर्शन में शामिल होने के कारण अभ्यर्थियों पर कार्रवाई नहीं करने का भरोसा भी दिया गया है। भर्ती के मुद्दे पर सरकार ने 3 जनवरी 2027 की ग्रुप सी परीक्षा में पदों की संख्या दोगुनी करने का प्रस्ताव रखा है, जबकि प्रदर्शनकारी इसे तीन गुना करने की मांग कर रहे थे। इसके अलावा डीएसपी जैसे पदों पर प्रमोशन के लिए 50:50 का अनुपात, तकनीकी पदों की भर्ती में बदलाव और मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) व पुणे महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (पीएमआरडीए) जैसी एजेंसियों के लिए परीक्षा प्रक्रिया को आसान बनाने के प्रस्ताव भी शामिल हैं।
मसौदे में उन विभागों और एजेंसियों के लिए अलग आयोग बनाने का सुझाव भी है, जिनकी परीक्षाएं कराने की क्षमता एमपीएससी के पास नहीं है। अभ्यर्थियों की मांग है कि यूपीएससी की तरह परीक्षाओं का सालाना कैलेंडर एक साल पहले जारी किया जाए। इसके लिए वी. राधा समिति के सुझावों के आधार पर व्यवस्था बनाने की बात भी कही गई है। फिलहाल, आंदोलन खत्म करने का फैसला सरकार की लिखित बातों पर अभ्यर्थियों की अंतिम सहमति पर निर्भर करेगा। इस समझौते के बाद आंदोलन का मुद्दा अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग से आगे बढ़कर परीक्षा में गड़बड़ियों की जांच और भर्ती प्रक्रिया में सुधार पर केंद्रित हो गया है।