पुणे न्यूज डेस्क: पुणे पुलिस की एक कार्रवाई अब उसके लिए मुश्किल बन गई है। हत्या के एक मामले में गिरफ्तार आरोपियों को पुलिस वाहन के बोनट पर बैठाकर जुलूस निकालने के मामले में महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने इस मामले में राज्य के मुख्य सचिव, डीजीपी और पुणे पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार को नोटिस जारी किया है। आयोग ने अपनी प्रारंभिक टिप्पणी में इस घटना को "जंगलराज" जैसा बताया है।
यह मामला जुलाई में हुए एक हत्या कांड से जुड़ा है। भारती विद्यापीठ पुलिस ने चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने चारों आरोपियों को वाहन के बोनट पर बैठाकर इलाके में घुमाया। आरोप है कि इस दौरान उन्हें घुटनों के बल चलने के लिए मजबूर किया गया और मारपीट भी की गई।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला और तूल पकड़ गया। वीडियो में मृतक के परिजन भी आरोपियों पर चप्पलों से हमला करते दिखाई दिए। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया।
मामले को गंभीर मानते हुए महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग ने पुणे पुलिस आयुक्त, जोन-2 के डीसीपी और भारती विद्यापीठ थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक से जवाब मांगा है। आयोग ने सभी अधिकारियों को 20 अगस्त तक इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
अब इस मामले में पुलिस की रिपोर्ट और आयोग की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।