पुणे न्यूज डेस्क: “उन्होंने 32 लाख रुपये सालाना की नौकरी का ऑफर ठुकरा दिया था, क्योंकि उनका सपना डीआरडीओ वैज्ञानिक बनने का था। लेकिन अब हमारे पास कुछ भी नहीं बचा,” अपनी बेटी को हादसे में खोने के एक दिन बाद राजस्थान के किसान बलवंत राम खड्डा ने कहा। उनकी बेटी कंचन की सोमवार सुबह पुणे के आनंदनगर इलाके में सिंहगढ़ रोड पर पीएमपीएमएल बस से गिरने के बाद मौत हो गई।
कंचन डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड टेक्नोलॉजी (DIAT) में एमटेक सेकेंड ईयर की छात्रा थीं। उन्होंने आईआईटी-बीएचयू के कैंपस प्लेसमेंट में 32 लाख रुपये सालाना की नौकरी का ऑफर मिलने के बावजूद कॉर्पोरेट करियर की जगह डिफेंस रिसर्च को चुना था। उनके पिता ने बताया कि कंचन भारतीय सेना के लिए काम करना चाहती थीं और इसी वजह से परिवार ने उनके आगे की पढ़ाई के फैसले का समर्थन किया। कंचन राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी तहसील के डाबजी खुर्द गांव की रहने वाली थीं और अपने गांव से आईआईटी-बीएचयू से बीटेक करने वाली पहली छात्रा थीं। सोमवार के हादसे के बाद परिवार को मंगलवार सुबह ससून जनरल अस्पताल से उनका शव सौंपा गया।
पढ़ाई में भी कंचन हमेशा आगे रही थीं। उन्होंने 10वीं और 12वीं में 90 फीसदी से ज्यादा अंक हासिल किए थे और इसके बाद इंजीनियरिंग की पढ़ाई डिस्टिंक्शन के साथ पूरी की। वह डीआईएटी में इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग से एमटेक कर रही थीं और पिछले कुछ महीनों से पुणे की डीआरडीओ लैब रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट, इंजीनियर्स, दिघी में एक प्रोजेक्ट पर काम कर रही थीं। उनके साथी छात्र ने बताया कि कंचन बेहद फोकस्ड और मेहनती थीं और उनका सपना डीआरडीओ में जाकर डिफेंस रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर काम करना था। डीआईएटी के एक सीनियर प्रोफेसर ने भी उन्हें विभाग की होनहार छात्राओं में से एक बताया।
कंचन की मौत ने डीआईएटी के छात्रों के रोजाना सफर से जुड़ी मुश्किलों को भी सामने ला दिया है। सेकेंड ईयर के छात्रों को पढ़ाई के तहत पुणे की अलग-अलग डीआरडीओ लैब और निजी कंपनियों में इंटर्नशिप और प्रोजेक्ट के लिए जाना पड़ता है। दिघी, पाशान और सुतारवाड़ी की लैब जाने वाले ज्यादातर छात्र पीएमपीएमएल बसों पर निर्भर हैं। खड़कवासला डैम के बैकवॉटर्स के पास स्थित डीआईएटी कैंपस से ये जगहें करीब 25-30 किलोमीटर दूर हैं और छात्रों का कहना है कि बसें अक्सर भीड़ से भरी रहती हैं। संस्थान ने बसों की संख्या बढ़ाने के लिए पीएमपीएमएल को पत्र लिखने का फैसला किया है। कुछ प्रोफेसर्स ने छात्रों के लिए अलग ट्रांसपोर्ट या डीआरडीओ हॉस्टल में रहने की व्यवस्था करने का सुझाव दिया है। डीआईएटी अधिकारियों के मुताबिक, संस्थान की इंटरनल कमेटियां इस मामले पर चर्चा करेंगी और आने वाले दिनों में उचित फैसला लिया जाएगा।