पुणे न्यूज डेस्क: महाराष्ट्र में खाद्य मिलावट के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच पुणे जिले के दौंड तालुका के करीब 400 गुड़ निर्माण केंद्रों को कुछ दिनों पहले बंद कर दिया गया था। एफडीए की कार्रवाई के बाद यह कदम उठाया गया, जिससे किसानों का कटा हुआ गन्ना खेतों और केंद्रों पर पड़ा रह गया और कई जगहों पर गन्ने की कटाई भी प्रभावित हुई। हालांकि अब स्थिति सामान्य होने लगी है और गुरुवार शाम से गुड़ उत्पादन फिर से शुरू कर दिया गया है।
गुड़ व्यवसायियों और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के अधिकारियों के बीच हुई बैठक के बाद यह फैसला लिया गया। बैठक में अधिकारियों ने साफ किया कि गुड़ उत्पादन पूरी तरह पारंपरिक और शुद्ध तरीके से किया जाना चाहिए। साथ ही चीनी, रासायनिक पदार्थ, चॉकलेट पाउडर या किसी अन्य मिलावटी सामग्री के इस्तेमाल से बचने के निर्देश दिए गए। इसके बाद क्षेत्र के अधिकांश गुड़ उत्पादन केंद्रों ने दोबारा काम शुरू कर दिया।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त तुकाराम मुंढे के कार्यभार संभालने के बाद राज्यभर में मिलावट के खिलाफ अभियान तेज हुआ है। विभिन्न जिलों में लगातार छापेमारी और जांच की जा रही है। इसी पृष्ठभूमि में दौंड तालुका के गुड़ उत्पादकों ने भी एहतियात के तौर पर अपने केंद्र बंद कर दिए थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि तालुका के इतिहास में पहली बार इतने बड़े स्तर पर सभी गुड़ निर्माण केंद्र एक साथ बंद हुए, जिससे गुड़ उत्पादन में गुणवत्ता और मिलावट का मुद्दा चर्चा का विषय बन गया।
इस बीच, गुड़ उद्योग से जुड़ा प्रदूषण का मुद्दा भी सामने आया है। नागरिकों का आरोप है कि कुछ केंद्रों में ईंधन के रूप में प्लास्टिक, रबर और पुराने टायरों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे जहरीला धुआं निकलता है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। वहीं कुछ इकाइयों ने प्रदूषण कम करने के लिए इलेक्ट्रिक बॉयलर अपनाए हैं, लेकिन इसके लिए भारी बिजली की जरूरत पड़ती है। विशेषज्ञों का मानना है कि एफडीए, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बिजली वितरण विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के नियमों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि किसानों को उचित मूल्य मिले, उपभोक्ताओं तक शुद्ध गुड़ पहुंचे और पर्यावरण संरक्षण भी बना रहे।