ताजा खबर
गोकुळ दूध संघ अध्यक्ष चुनाव: सतेज पाटिल की मुंबई प्रेस कॉन्फ्रेंस और सरकार पर तीखा हमला   ||    विराट कोहली का 38वां जन्मदिन और विश्व क्रिकेट में उनका ऐतिहासिक कद   ||    सोनू सूद की टोपी बाजों की पंचायत ने जीता फैंस का दिल   ||    लडाकू के साथ फिर लौटेगी कार्तिक आर्यन और कबीर खान की जोड़ी   ||    गनमास्टर G9 में इमरान हाशमी का खूंखार अवतार आया सामने   ||    अजय देवगन की दृश्यम सक्सेस पार्टी में जुटे बॉलीवुड सितारे   ||    पुणे की आंदेकर गैंग से जुड़े मामले में लक्ष्मी आंदेकर को हाईकोर्ट से जमानत, सरकारी पक्ष की मांग खारि...   ||    पुणे से छुट्टी मिलने के कुछ घंटों बाद मुंबई के अस्पताल में भर्ती हुए शरद पवार, पीएम मोदी ने फोन कर ज...   ||    2 लाख के कर्ज को लेकर घर पहुंचकर दी धमकी, पनवेल में 11वीं मंजिल से कूदी महिला और उसके दो बच्चे   ||    पुणे पुलिस कमिश्नर के बंगले के गेट से टकराई कॉन्स्टेबल की कार, शराब के नशे में होने का आरोप   ||   

VRS के 65.21 लाख रुपये पर टैक्स विवाद, ITAT ने कर्मचारी को दी बड़ी राहत; रकम को माना नॉन-टैक्सेबल कैपिटल रिसीट

Photo Source : Google

Posted On:Wednesday, October 7, 2026

पुणे न्यूज डेस्क: वीआरएस लेकर नौकरी छोड़ने वाले एक कर्मचारी ने अपने आईटीआर में करीब 65.21 लाख रुपये की रकम को एडवांस सैलरी के तौर पर दिखाया, लेकिन इसी रिपोर्टिंग के तरीके ने उसे इनकम टैक्स विभाग के साथ लंबे विवाद में डाल दिया। मामला 2018-19 का है, जब औरंगाबाद में उसकी कंपनी का मैन्युफैक्चरिंग प्लांट बंद हुआ और कर्मचारियों के लिए एक खास वित्तीय स्कीम लाई गई। कर्मचारी ने इस स्कीम के तहत वीआरएस लिया और उसे कुल 65,21,105 रुपये मिले, जिसमें एक्स-ग्रेशिया/सर्विसेंस पे, अर्ली बिड और ग्रुप पार्टिसिपेशन इंसेंटिव के साथ नोटिस पीरियड का भुगतान शामिल था।

कर्मचारी ने आईटीआर में इस रकम को एडवांस सैलरी बताया और इनकम टैक्स एक्ट की धारा 89 के तहत टैक्स राहत मांगी। विभाग ने उसके दावे को सही नहीं माना और राहत देने से इनकार कर दिया। इसके बाद कर्मचारी ने अपनी दलील बदली और कहा कि यह रकम सैलरी थी ही नहीं, बल्कि नौकरी जाने से हुए नुकसान के बदले मिली कैपिटल रिसीट थी, इसलिए इस पर टैक्स नहीं लगना चाहिए। हालांकि, सीआईटी(ए)/एनएफएसी ने रकम को ‘इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज’ माना और धारा 56(2)(xi) के तहत इसे टैक्स के दायरे में रखा।

मामला पुणे इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल यानी आईटीएटी पहुंचा। 8 जून 2026 के अपने फैसले में ट्रिब्यूनल ने कर्मचारी की दलील को स्वीकार करते हुए 65.21 लाख रुपये को नॉन-टैक्सेबल कैपिटल रिसीट माना। कर्मचारी ने बताया था कि उसने किसी जबरन टर्मिनेशन के कारण नहीं, बल्कि कंपनी की खास स्कीम के तहत वीआरएस/रिजाइन किया था। स्कीम में भी साफ लिखा था कि नौकरी खत्म होने को रिजाइन माना जाएगा, रिट्रेंचमेंट या कंपनी की ओर से टर्मिनेशन नहीं। इसलिए ट्रिब्यूनल ने माना कि धारा 56(2)(xi) के तहत टैक्स लगाने की शर्त यहां पूरी नहीं होती।

आईटीएटी ने यह भी ध्यान दिया कि इसी कंपनी के दूसरे कर्मचारियों को इसी स्कीम के तहत मिली रकम से जुड़े मामलों में पहले भी ट्रिब्यूनल के अलग-अलग बेंच ने इसे कैपिटल रिसीट माना था। चार्टर्ड अकाउंटेंट सुरेश सुराणा के मुताबिक, ट्रिब्यूनल ने इसी तरह के मामलों में अपनाए गए फैसलों को देखते हुए ‘कंसिस्टेंसी’ के सिद्धांत को भी लागू किया। आखिरकार पुणे आईटीएटी ने सीआईटी(ए)/एनएफएसी का आदेश पलट दिया और आकलन अधिकारी को असेसमेंट में बदलाव करने का निर्देश दिया। यानी इस मामले में कर्मचारी को राहत इसलिए मिली क्योंकि रकम को नौकरी के टर्मिनेशन से जुड़ा भुगतान नहीं, बल्कि वीआरएस/रिजाइन के तहत मिली कैपिटल रिसीट माना गया।


पुणे और देश, दुनियाँ की ताजा ख़बरे हमारे Facebook पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें,
और Telegram चैनल पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



You may also like !

मेरा गाँव मेरा देश

अगर आप एक जागृत नागरिक है और अपने आसपास की घटनाओं या अपने क्षेत्र की समस्याओं को हमारे साथ साझा कर अपने गाँव, शहर और देश को और बेहतर बनाना चाहते हैं तो जुड़िए हमसे अपनी रिपोर्ट के जरिए. punevocalsteam@gmail.com

Follow us on

Copyright © 2021  |  All Rights Reserved.

Powered By Newsify Network Pvt. Ltd.