पुणे न्यूज डेस्क: हिंदी सिनेमा में अपनी दमदार एक्टिंग के लिए पहचाने जाने वाले नाना पाटेकर ने फिल्मों से दूर अपनी जिंदगी का एक अलग ही तरीका चुना था। 75 साल की उम्र में 8 अक्टूबर को उनके निधन के बाद उनकी फिल्मों के साथ-साथ उनके उस सादगी भरे जीवन की भी चर्चा हो रही है, जिसे वह पुणे के अपने फार्महाउस में जीना पसंद करते थे। खड़कवासला के पास बना यह फार्महाउस मुंबई की भागदौड़ से दूर उनके लिए खेती और गांव की जिंदगी से जुड़ने की जगह था।
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, नाना पाटेकर का यह फार्महाउस करीब 27 एकड़ में फैला हुआ है। यहां लकड़ी का फर्नीचर, टेराकोटा फ्लोरिंग, लकड़ी की बीम वाली छत और चारों तरफ हरियाली देखने को मिलती है। फार्महाउस में सात कमरे और एक बड़ा हॉल है। इसका लुक किसी आलीशान सेलिब्रिटी हाउस की तरह नहीं, बल्कि एक सादे और आरामदायक ग्रामीण घर जैसा है।
नाना पाटेकर के लिए खेती सिर्फ जमीन रखने का शौक नहीं थी, बल्कि वह इसे अपनी जिंदगी का हिस्सा मानते थे। कई इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वह फार्म पर चावल, गेहूं, बाजरा, प्याज और लहसुन उगाते थे। कोविड-19 लॉकडाउन का काफी समय भी उन्होंने इसी फार्महाउस में बिताया था। 2023 में फिल्मफेयर को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वहां उनके साथ पांच कुत्ते, 12 गाय और दो बैल भी रहते थे।
फार्महाउस नाना पाटेकर के लिए फिल्मों के बीच कुछ दिन बिताने की जगह भर नहीं था, बल्कि वह इसी तरह की सादगी भरी जिंदगी को पसंद करते थे। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें फिल्म सेट पर काम करने की कमी महसूस होती है, तो उन्होंने कहा था कि उन्हें ऐसा नहीं लगता। वह खुद को गांव की जिंदगी में सहज महसूस करते थे। कैमरों और स्टारडम से दूर उनका यह फार्महाउस खेती, जानवरों, सादगी और दूसरों की मदद से जुड़ी उनकी जिंदगी की एक अलग तस्वीर दिखाता है।