पुणे न्यूज डेस्क: मंत्री हसन मुश्रीफ ने कहा है कि गोकुल दूध संघ में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ही सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने दावा किया कि आगामी चुनाव महायुति के रूप में मिलकर लड़ा जाएगा और जीत भी हासिल की जाएगी। मुश्रीफ ने कहा कि गोकुल की दूध उत्पादक संस्थाओं पर कुछ ‘अदृश्य शक्तियों’ ने बेवजह आपत्ति जताई थी, लेकिन वे लगातार इन संस्थाओं के साथ खड़े रहे। सर्किट बेंच से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक संस्थाओं को कानूनी मदद दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि अब विधायक सतेज पाटील चुनाव में सहानुभूति हासिल करने के लिए अदालत में मदद करने का दावा कर रहे हैं और उन्हें इस तरह की राजनीति से बचना चाहिए।
मुश्रीफ के मुताबिक, गोकुल का दूध संग्रह बढ़ाने के लिए नई संस्थाएं बनाई गईं, जिससे दूध संग्रह 9 लाख लीटर से बढ़कर 20 लाख लीटर तक पहुंच गया। उन्होंने कहा कि बढ़ाई गई संस्थाओं में कुछ को छोड़ दें तो ज्यादातर संस्थाएं राष्ट्रवादी कांग्रेस, शिवसेना और जनसुराज्य पार्टी यानी महायुति से जुड़े कार्यकर्ताओं की हैं। ऐसे में उन्हें मतदाता सूची से बाहर करने की कोशिश क्यों की गई, यह सवाल उठता है। उन्होंने यह भी पूछा कि जब एकनाथ शिंदे के मुख्यमंत्री बनने और अतुल सावे के सहकारिता मंत्री रहने के दौरान 308 दिन तक उनकी सरकार थी, तब इन ‘अदृश्य शक्तियों’ ने अपनी संस्थाओं की संख्या क्यों नहीं बढ़ाई।
महायुति के करीब 3500 सदस्य
मुश्रीफ ने बताया कि गोकुल के चुनाव में कुल 5,380 सदस्य मतदान करेंगे। कांग्रेस से जुड़े सदस्यों को अलग करने के बाद करीब 3,500 सदस्य राष्ट्रवादी कांग्रेस, शिवसेना और जनसुराज्य पार्टी के हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में महायुति का पैनल बनाया जाएगा। इसमें किस पार्टी को कितनी सीटें मिलेंगी, इसका फैसला बैठक के बाद होगा। वहीं पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र को लेकर मुश्रीफ ने कहा कि पिछली विधान परिषद चुनाव के दौरान अरुण लाड ने प्रताप माने को अगली बार चुनाव लड़ने का मौका देने की बात कही थी। अब उन्हें अपना वादा निभाते हुए अपने बेटे शरद लाड को समझाना चाहिए। मुश्रीफ ने कहा कि प्रताप माने शिक्षा क्षेत्र में अच्छा काम कर रहे हैं और जेन-जी पीढ़ी की समस्याओं को समझने की क्षमता रखते हैं।
मुश्रीफ ने प्रकाश बेलवाडे का नाम लिए बिना ‘अदृश्य शक्ति’ पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अधूरे ज्ञान वाले लोगों की सलाह लेने का नतीजा बर्बादी के रूप में सामने आता है और इसी तरह की सलाह के कारण संस्थाओं को अदालत तक घसीटा गया। दूसरी ओर, भाजपा मंत्री नीतेश राणे ने कहा कि हिंदुओं को सामान खरीदते समय यह देखना चाहिए कि सामने वाला व्यक्ति हिंदू है या नहीं। उन्होंने कहा कि अगर कोई हिंदू नहीं है और उसे हनुमान चालीसा या गणपति बप्पा की आरती नहीं आती, तो उससे सामान नहीं खरीदने की भूमिका हर हिंदू को अपनानी चाहिए। राणे ने यह भी कहा कि उनकी सरकार में सबसे पहले हिंदुओं के हित देखे जाएंगे और फिर बाकी सभी को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि कोई भी ‘वळवळ’ यानी विरोध या परेशानी खड़ी करने की कोशिश न करे।