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पुणे के इंदापुर में अक्टूबर में ही पानी का संकट, सूखने लगीं खरीफ की फसलें; चारे की भी चिंता

Photo Source : Google

Posted On:Saturday, October 10, 2026

पुणे न्यूज डेस्क: पुणे जिले के किसानों पर एक बार फिर सूखे का संकट गहराने लगा है। बारिश का इंतजार करते किसानों के सामने अब खेतों में सूखती फसलों को बचाने की चुनौती है। कुछ तालुकों में सरकार ने सूखा घोषित कर राहत देने की कोशिश की है, लेकिन जिन इलाकों को इस दायरे में नहीं रखा गया, वहां भी हालात काफी खराब हैं। जमीन में दरारें पड़ रही हैं और फसलें सूखने लगी हैं। एक ही जिले में किसानों को मिलने वाली राहत में अंतर होने से मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

इंदापुर तालुका के वडापुरी और आसपास के इलाकों में बारिश नहीं होने से अक्टूबर में ही खरीफ की फसलें सूखने लगी हैं। रेडणी, लाखेवाड़ी, रेडा, पंधारवाड़ी, वडापुरी और अवसरी जैसे गांवों में पानी की कमी महसूस होने लगी है। इसका सीधा असर खेती पर पड़ रहा है। किसान मक्का और दूसरी फसलों के साथ-साथ गन्ने और पशुओं के चारे को बचाने के लिए उपलब्ध पानी का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर कर रहे हैं।

बारिश नहीं होने से खेतों की नमी लगातार कम हो रही है। वहीं, कुओं और बोरवेल में पानी का स्तर भी गिर रहा है, जिससे फसलों को पर्याप्त पानी देना मुश्किल हो गया है। मक्का की फसल को बचाने के लिए किसानों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। ऐन फसल के समय पौधों के सूखने से उत्पादन घटने की आशंका बढ़ गई है। किसानों को डर है कि अगर पानी की कमी इसी तरह बनी रही, तो उनकी मेहनत और लागत दोनों पर असर पड़ेगा।

फसलों के साथ अब पशुओं के चारे की चिंता भी बढ़ने लगी है। हरा चारा कम मिलने पर पशुपालकों को परेशानी हो सकती है और सूखा चारा भी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिला, तो पशुओं को पालना मुश्किल हो जाएगा। अक्टूबर में ही पानी की ऐसी स्थिति बनने से किसानों को रबी की फसल की भी चिंता सताने लगी है। परती की बारिश नहीं होने के कारण इंदापुर में पानी का संकट गहरा रहा है। किसानों का कहना है कि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले महीनों में खेती और पशुपालन दोनों पर संकट बढ़ सकता है।


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