पुणे न्यूज डेस्क: लेखक और स्तंभकार (columnist) चेतन भगत ने भारत टुडे को दिए एक विशेष इंटरव्यू में 'पुणे मर्डर मिस्ट्री' और सिया गोयल पर लिखे अपने हालिया कॉलम को लेकर जनता के बीच चल रही तीखी बहस पर अपनी खुलकर बात रखी है। इस दुखद मामले पर चर्चा करते हुए भगत ने अपने नजरिए का बचाव किया और साफ कहा, "अगर सिया अपराधी है, तो कानून उसे सजा देगा और सिर्फ कानून ही उसे सजा दे सकता है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मकसद कथित अपराध को सही ठहराना नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपी सामाजिक समस्याओं को समझाना था।
इंटरव्यू के दौरान चेतन भगत ने भारत के अमीर और बड़े व्यापारिक परिवारों (business families) की आंतरिक संस्कृति पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने तर्क दिया कि ये समृद्ध परिवार आज भी बेहद रूढ़िवादी (regressive) और नियंत्रणकारी मानसिकता के हैं। भगत ने रेखांकित किया कि इन रईस घरों के बच्चों से अक्सर उनकी स्वतंत्रता छीन ली जाती है, वे वित्तीय स्थिरता के लिए पूरी तरह से अपने माता-पिता पर निर्भर होते हैं, और शादी जैसे बुनियादी फैसले लेने के लिए भी आजाद नहीं होते।
व्यक्तिगत स्वतंत्रता और एजेंसी की इसी कमी पर जोर देते हुए लेखक ने कहा कि इन परिवारों में माता-पिता अक्सर बच्चों की पसंद की शादी का कड़ा विरोध करते हैं, जो भारत में आज भी पैरेंटल कंट्रोल (माता-पिता के अत्यधिक नियंत्रण) की कड़वी सच्चाई को दर्शाता है।