पुणे न्यूज डेस्क: महाराष्ट्र में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की कार्रवाई के बीच बॉम्बे हाई कोर्ट ने पुणे की एक डेयरी को बड़ी राहत दी है। अदालत ने एफडीए द्वारा डेयरी का लाइसेंस निलंबित करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए कहा कि संस्था को कथित कमियां दूर करने का अवसर दिए बिना यह कार्रवाई की गई।
न्यायमूर्ति एन. जे. जमादार ने अपने आदेश में कहा कि एफडीए यह स्पष्ट नहीं कर सका कि जनस्वास्थ्य के हित में सीधे लाइसेंस निलंबित करना क्यों जरूरी था और इससे कम कठोर कदम क्यों पर्याप्त नहीं होते।
यह मामला अथर्वा मिल्क एंड मिल्क प्रोडक्ट्स इंडस्ट्रीज (AMMPI) की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिका में कहा गया कि 7 जुलाई को सहायक आयुक्त एवं नामित अधिकारी ने बिना विधिवत निरीक्षण और निरीक्षण रिपोर्ट तैयार किए ही डेयरी का लाइसेंस निलंबित कर दिया। साथ ही, खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के अनिवार्य प्रावधानों का पालन भी नहीं किया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आशुतोष कुंभकोणी और अधिवक्ता मनोज बडगुजर ने अदालत में दलील दी कि लाइसेंस का तत्काल निलंबन जैसी कठोर कार्रवाई का कोई आधार नहीं था। उनका कहना था कि एफडीए ने केवल कथित कमियों का उल्लेख किया, लेकिन उन्हें सुधारने का अवसर नहीं दिया।
वहीं, राज्य सरकार ने एफडीए की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि सहायक आयुक्त ने खाद्य सुरक्षा को संभावित खतरा मानते हुए अपने विवेक के आधार पर लाइसेंस निलंबित किया था। सरकार ने एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे द्वारा 10 जुलाई को जारी एक परिपत्र का भी हवाला दिया।
अदालत ने प्रारंभिक तौर पर माना कि रिकॉर्ड से यह प्रतीत होता है कि डेयरी ने कुछ मानकों का आंशिक पालन किया था, जबकि संचालन, रखरखाव, स्वच्छता, प्रशिक्षण और रिकॉर्ड रखने जैसे कुछ बिंदुओं पर कमियां थीं। हालांकि, अदालत ने कहा कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 32 के तहत पहले सुधार नोटिस देना और कमियां दूर करने का अवसर देना आवश्यक था।
याचिका में यह भी बताया गया कि डेयरी प्रतिदिन करीब 25,000 लीटर दूध का प्रसंस्करण करती है। इससे 35-40 कर्मचारी और लगभग 2,000 किसान अपनी आजीविका के लिए जुड़े हुए हैं।
हाई कोर्ट ने मामले में एफडीए आयुक्त समेत सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर 10 अगस्त तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।