पुणे न्यूज डेस्क: पुणे महानगरपालिका में बीजेपी और राष्ट्रवादी कांग्रेस के बीच चल रहा विवाद आखिरकार शांत होता दिख रहा है। बीजेपी ने राष्ट्रवादी के साथ गठबंधन खत्म करने का ऐलान किया था, लेकिन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार की नाराजगी के बाद दोनों दलों के नेताओं की मंगलवार को बैठक हुई। बैठक में दोनों पक्षों के बीच फिर से समझौता हो गया। इससे महापालिका में पिछले कुछ दिनों से चल रहा सियासी घमासान फिलहाल खत्म होता नजर आ रहा है।
दरअसल, अमोल बालवडकर और सुहास टिंगरे ने कोथरूड के विधायक चंद्रकांत पाटील के विधायक निधि से हुए करीब 38 लाख रुपये के कामों का ऑडिट कराने की मांग की थी। इस पर बीजेपी ने दोनों पार्षदों के 12 करोड़ रुपये के फंड की मंजूरी रोक दी थी। इसके बाद महापालिका सदन में और बाहर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और प्रदर्शन शुरू हो गए थे। विवाद को आगे बढ़ने से रोकने के लिए वरिष्ठ नेताओं ने हस्तक्षेप किया।
मंगलवार की बैठक में बीजेपी की ओर से महापौर मंजूषा नागपुरे और सभागृह नेता गणेश बीडकर मौजूद रहे। वहीं राष्ट्रवादी की ओर से विधायक चेतन तुपे, विपक्ष के नेता नीलेश निकम और शहर अध्यक्ष सुनील टिंगरे शामिल हुए। बैठक में विकास कार्यों और फंड को लेकर भी चर्चा हुई। सुहास टिंगरे का रोका गया फंड वापस मिलने की संभावना है, जबकि अमोल बालवडकर के फंड पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। इस बीच दिवंगत अजित पवार के तैलचित्र के लिए महापालिका में जगह भी तय की गई।
बैठक के बाद गणेश बीडकर ने कहा कि दोनों दलों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद नहीं हैं और पुणे के विकास के लिए साथ मिलकर काम किया जाएगा। चेतन तुपे ने भी कहा कि महायुति का सम्मान बनाए रखते हुए पुणेकरों के हित में काम करने पर चर्चा हुई है। ऐसे में पुणे महापालिका में बीजेपी और राष्ट्रवादी के बीच छिड़ा विवाद फिलहाल सुलझता नजर आ रहा है।