पुणे न्यूज डेस्क: पुणे विभाग के पदवीधर और शिक्षक मतदारसंघ की चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद महानगरपालिका के कई कामों पर असर पड़ा है। इसी बीच ढोले पाटील रोड क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से प्रभाग क्रमांक 13-डी में करीब 1.40 करोड़ रुपये के 17 टेंडर जारी किए गए हैं। ये काम नगरसेवकों की ‘स’ सूची के तहत बताए गए हैं। इनमें चेंबर की मरम्मत, फुटपाथ ठीक करना और सीवरेज लाइन से जुड़े काम शामिल हैं। आचार संहिता के दौरान टेंडर जारी किए जाने को लेकर अब प्रशासन के भीतर ही अलग-अलग राय सामने आ रही है।
पुणे विभाग की दोनों विधान परिषद सीटों के चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ आचार संहिता लागू हो गई थी। चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक ऐसी स्थिति में नए कामों और सरकारी फैसलों पर कुछ पाबंदियां रहती हैं, हालांकि जरूरी रखरखाव और आपात काम किए जा सकते हैं। इसी बीच परिमंडल-1 के ढोले पाटील रोड क्षेत्रीय कार्यालय ने प्रभाग 13-डी में ‘स’ सूची के कामों के लिए निविदाएं जारी कर दीं। इन कामों में चेंबर और शौचालय की मरम्मत, बड़े व्यास की सीवरेज लाइन डालना, बारिश के चेंबर और पाइप की मशीनों से सफाई और फुटपाथ की मरम्मत शामिल है।
इन 17 कामों पर कुल 1 करोड़ 40 लाख 95 हजार 891 रुपये खर्च होने हैं। टेंडर में ठेकेदार के पास खुद की मशीनरी और कम से कम 10 साल का अनुभव होने की शर्त भी रखी गई है। महानगरपालिका की उपायुक्त आशा राऊत के मुताबिक, प्रभाग 13-डी में सड़क और मलनिःसारण विभाग के कुछ जरूरी रखरखाव के काम थे और चुनाव शाखा से जानकारी लेने के बाद ही निविदाएं जारी की गईं। वहीं, चुनाव शाखा के उपायुक्त प्रसाद काटकर ने कहा कि आचार संहिता के दौरान जरूरी रखरखाव और मरम्मत के काम किए जा सकते हैं।
हालांकि प्रसाद काटकर ने यह भी कहा कि ये काम नगरसेवकों की ‘स’ सूची के लिए रखे गए फंड से जुड़े थे, इसलिए आचार संहिता के दौरान इन्हें निकालने के बजाय बाद में करना उचित होता। उनका कहना है कि इन कामों के लिए मुख्य विभाग के फंड का इस्तेमाल भी किया जा सकता था। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आचार संहिता लागू होने के बाद ‘स’ सूची के लिए रखे गए फंड से टेंडर जारी करने की जल्दबाजी क्यों की गई। पुणे में आचार संहिता के बावजूद जरूरी नागरिक काम जारी रखने की बात महानगरपालिका आयुक्त नवल किशोर राम भी कह चुके हैं।